प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से 4 कमोडिटीज का इस्तेमाल ज्यादा समझदारी से करने की अपील की है। ये कमोडिटी हैं- कच्चा तेल (पेट्रोल-डीजल), सोना, वनस्पति तेल और खाद। यह अपील देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और आर्थिक मजबूती बढ़ाने की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है। PM की ये टिप्पणियां पश्चिम एशिया संकट के बीच आई हैं। 28 फरवरी 2026 से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध ने आयात की लागत में काफी बढ़ोतरी कर दी है। महंगे कच्चे तेल के आयात और कमजोर रुपये के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।
इन चारों कमोडिटीज की भारत में खपत कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश का 240 अरब डॉलर से ज्यादा का आयात सिर्फ इन 4 कमोडिटी ग्रुप से हुआ। मनीकंट्रोल ने ट्रेड डेटा का एनालिसिस किया है। उससे पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025–26 में भारत ने 240.7 अरब डॉलर का कच्चा तेल, सोना, वनस्पति तेल और खाद विदेश से मंगाई। यह देश के कुल 775 अरब डॉलर के आयात बिल का 31.1 प्रतिशत है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे पेट्रोलियम का रहा, जिसका आयात 134.7 अरब डॉलर का रहा। सोने का आयात बढ़कर रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वनस्पति तेल का आयात 19.5 अरब डॉलर और खाद का आयात बढ़कर 14.5 अरब डॉलर हो गया।
PM मोदी की देशवासियों से क्या अपील
PM मोदी ने नागरिकों से इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाकर, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करके, कार-पूलिंग करके और माल ढुलाई को रेलवे पर शिफ्ट करके पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की अपील की है। किसानों से डीजल से चलने वाले पंपों की जगह सौर ऊर्जा वाले विकल्प अपनाने और रासायनिक खाद का इस्तेमाल 50 प्रतिशत तक कम करने का आग्रह किया है। इसके अलावा घरों में खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने और गैर-जरूरी सोने की खरीदारी को एक साल के लिए टालने की अपील है।
PM मोदी ने हैदराबाद में तेलंगाना BJP द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, "वैश्विक संकट के दौरान देश को सबसे ऊपर रखते हुए, हमें कुछ संकल्प लेने होंगे... एक बड़ा संकल्प पेट्रोल और डीजल का समझदारी से इस्तेमाल करना होना चाहिए।"
पश्चिम एशिया संकट खड़ी कर रहा मुश्किलें
भारत की कच्चे तेल की बास्केट का औसत अप्रैल में 114.48 डॉलर प्रति बैरल और मई में 105.4 डॉलर प्रति बैरल रहा। वित्त वर्ष 2026 में इसका औसत 70.99 डॉलर प्रति बैरल था। व्यवहार में छोटे-मोटे बदलावों का भी भारत के बाहरी खातों पर काफी असर पड़ सकता है, क्योंकि आयात पर खर्च होने वाले हर 3 डॉलर में से लगभग एक डॉलर इन 4 कमोडिटीज पर ही खर्च होता है। अगर इसमें ऑर्गेनिक रसायन और खाद उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी शामिल कर लिया जाए, तो आयात बिल और भी बढ़ जाता है। इनमें से कई चीजों की आवाजाही होर्मुज स्ट्रेट से ही होती है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को अभी ईरान ने लगभग बंद कर रखा है।
सोने और खाद से जुड़ी चिंताएं
सोना और खाद इस आयात बास्केट के सबसे तेजी से बढ़ने वाले घटक हैं। सोने का आयात वित्त वर्ष 2025 में 58 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 72 अरब डॉलर हो गया, जो लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं, उर्वरक का आयात 77 प्रतिशत बढ़कर 14.6 अरब डॉलर हो गया। हालांकि कच्चे तेल का आयात वित्त वर्ष 2025 के 143.1 अरब डॉलर से कम रहा, फिर भी यह भारत के कुल आयात का 17.4 प्रतिशत रहा। वनस्पति तेलों का हिस्सा 2.5 प्रतिशत और उर्वरकों का 1.9 प्रतिशत रहा।