ऐसी अटकलें हैं कि सरकार सोने के आयात पर शुल्क यानि कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है। लेकिन अब स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हो गई है। सरकार के एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया है कि सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने की अटकलें तब लगने लगीं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए देशवासियों से एक साल तक सोने की खरीद और विदेश यात्रा टालने की अपील की।
PM मोदी ने रविवार को हैदराबाद में तेलंगाना BJP द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बुरे असर से लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ईंधन का समझदारी से इस्तेमाल करने, सोने की खरीद और विदेश यात्रा टालने जैसे कई उपायों पर अमल करने की भी अपील की।
पीएम ने किसानों से डीजल से चलने वाले पंपों की जगह सौर ऊर्जा वाले विकल्प अपनाने, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने, घरों में खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने, वर्क फ्रॉम होम विकल्प का इस्तेमाल करने की अपील भी की।
ज्वेलरी स्टॉक्स में बिकवाली
सोने को लेकर PM मोदी की ओर से की गई अपील के बाद सोमवार को ज्वेलरी स्टॉक्स में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। कल्याण ज्वेलर्स का शेयर 9 प्रतिशत टूटा। सेनको गोल्ड ने 8 प्रतिशत की गिरावट झेली। टाइटन कंपनी के शेयर 7 प्रतिशत, त्रिभुवनदास भीमजीदास झवेरी के शेयर 7.5 प्रतिशत, स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स और ब्लूस्टोन ज्वेलरी 6-6 प्रतिशत और पीसी ज्वेलर का शेयर 5 प्रतिशत नीचे आया।
महंगे कच्चे तेल के आयात और कमजोर रुपये के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने सोने के आयात में कटौती करने और जरूरी जरूरतों के लिए डॉलर बचाने को एक "राष्ट्रीय जिम्मेदारी" बताया है। बोनांजा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि भारत का सोने का आयात वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 58 अरब डॉलर था। मात्रा के हिसाब से सोने का आयात घटकर लगभग 721 टन रह गया। सोने की वैश्विक कीमतें काफी बढ़ने से भारत कम सोना इंपोर्ट करने के बावजूद कहीं ज्यादा डॉलर खर्च कर रहा है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।