Rupee Level: रुपया तेजी से कमजोर हो रहा है लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि नियर टर्म में एक डॉलर के मुकाबले इसके ₹100 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिरने के आसार दिख नहीं रहे हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि अगर मौजूदा मैक्रोइकनॉमिक और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बनी रही तो ऐसा होने की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता है। 12 मई को रुपया एक ड़ॉलर के मुकाबले ₹95.74 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया था लेकिन फिर इसने थोड़ी रिकवरी की और यह ₹95.63 पर बंद हुआ।
क्यों कमजोर हो रहा रुपया?
शिनहान बैंक के ट्रेजरी हेड कुणाल सोधानी के मुताबिक रुपये की कमजोरी भारत की तेल के आयात पर निर्भरता और विदेशी निवेश की सुस्ती चलते अधिक है तो दूसरी तरफ ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने डॉलर को मजबूत किया है जिससे उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण कम हुआ है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशक अब तक भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट से करीब $2100 करोड़ निकाल चुके हैं।
तेल की बात करें तो अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई के चलते कच्चा तेल उबल पड़ा जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की दिक्कतें बढ़ी हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% हिस्सा तेल आयात करता है और अमेरिका-ईरान जंग ने स्ट्रेड ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से सप्लाई चेन में दिक्कतों ने इसे प्रति बैरल $100 के पार पहुंचा दिया है।
क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक नियर टर्म में रुपया एक डॉलर के मुकाबले ₹96-₹97 का लेवल छू सकता है लेकिन ₹100 का लेवल छूने में इसे मीडियम से लॉन्ग टर्म लग सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल $130 के पार पहुंचता है तो रुपया एक डॉलर के मुकाबले ₹100 के लेवल को छू सकता है लेकिन अभी ऐसा होने के आसार दिख नहीं रहे हैं।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के फोरेक्स एनालिस्ट दिलीप परमार का कहना है कि सितंबर के आखिरी तक मार्केट को जियो-पॉलिटिकल लेवल पर स्थिरता की उम्मीद है। उनका कहना है कि रुपये में काफी गिरावट आ चुकी है और अब इस साल एक डॉलर के मुकाबले इसके ₹100 तक फिसलने के आसार नहीं हैं लेकिन वित्त वर्ष 2028 में ऐसा हो सकता है। बता दें कि ब्रेंट क्रूड ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से 50% से अधिक उछल चुका है और दो महीने से एक बैरल $100 के पार बना हुआ है। एक बार तो इसने प्रति बैरल $120 का भी लेवल पार कर दिया था।
क्या है RBI की स्ट्रैटेजी?
इस समय बाजार की नजर आरबीआई की हस्तक्षेप रणनीति पर है। पहले की तरह आक्रामक तरीके से डॉलर बेचने के बजाय केंद्रीय बैंक रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए अन्य उपायों पर विचार करेगा। आरबीआई के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक 1 मई तक फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व वीकली लेवल पर $69.85 हजार करोड़ से गिरकर $69.06 हजार करोड़ पर आ गया तो रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) भी करीब $200 करोड़ गिरकर $5.57 हजार करोड़ पर आ गया। 27 फरवरी को समाप्त होने वाले हफ्ते में यानी ईरान-अमेरिका वार शुरू होने से ठीक पहले देश का फॉरेक्स रिजर्व $72.85 हजार करोड़ के रिकॉर्ड लेवल पर था। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयरएज रेटिंग्स के एनालिस्ट्स के मुताबिक फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट से संकेत मिलता है कि आरबीआई पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए सावधानीपूर्वक कदम उठाएगा, लेकिन उसके पास बाजार में हस्तक्षेप की क्षमता अभी भी है।
आरबीआई की नेट शॉर्ट फॉरवर्ड पोजिशन भी चिंता का विषय है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मार्च के आखिरी तक यह $10.3 हजार करोड़ तक पहुंच चुकी थी, और केयरएज रेटिंग्स के मुताबिक अप्रैल के आखिरी तक इसके $10.5 हजार करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
मार्केट एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई और कदम उठा सकता है जैसे कि फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट डिपॉजिट (FCNR-B) स्कीम और डॉलर या विदेशी मुद्रा में बॉन्ड जारी करना। परमार के मुताबिक मार्केट को उम्मीद है कि आरबीआई कुछ कदम उठाएगा। उनका कहना है कि केंद्रीय बैंक ने बैंकों को डॉलर और विदेशी मुद्रा बॉन्ड जारी करने के लिए कहा है जिससे कुछ निवेश आने की उम्मीद है, लेकिन कितना और कब तक आएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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