साइंस में होगी अब आयूर्वेद की पढ़ाई, कक्षा 6 से 8वीं के छात्रों के लिए NCERT का बड़ा बदलाव

NEP2020 की सोच के अनुरूप चलते हुए एनसीईआरटी ने कक्षा 6 से 8वीं तक के छात्रों के विज्ञान के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव का फैसला किया है। इन कक्षाओं के छात्र अब विज्ञान के विषय में आयुर्वेद के बारे में भी जानेंगे। इससे उन्हें पोषण और पर्यावरण संतुलन को भारतीय दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलेगा।

अपडेटेड Oct 31, 2025 पर 10:22 AM
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कक्षा 6 के विज्ञान के पाठ्यक्रम में आयुर्वेद के 20 गुणों जैसे मूल सिद्धांत जोड़े गए हैं।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) कक्षा 6 से 8वीं तक के छात्रों के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के मकसद से किया जा रहा है। इसके तहत कक्षा 6 से 8वीं तक के छात्रों के विज्ञान विषय के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। इनकी साइंस के कोर्स में अब आयुर्वेद के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। कक्षा 6 के विज्ञान के पाठ्यक्रम में आयुर्वेद के 20 गुणों जैसे मूल सिद्धांत जोड़े गए हैं। वहीं, कक्षा 8 में आयुर्वेद शरीर, मन और पर्यावरण का संतुलन शीर्षक से नया चैप्टर जोड़ा गया है। एनसीईआरटी के डायरेक्टर दिनेश प्रसाद सकलानी ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को वैज्ञानिक ज्ञान के साथ शारीरिक और मानसिक कल्याण के सिद्धांतों से भी जोड़ना है।

आयुर्वेद के वैज्ञानिक सिद्धांत सरल भाषा में

कक्षा 6: छात्र Classification of Matter के लिए आयुर्वेद के 20 विरोधी गुण (जैसे, गरम-ठंडा, हल्का-भारी आदि) के सिद्धांत समझेंगे। इससे उन्हें ओवरऑल हेल्थ की बुनियादी समझ मिलेगी।

कक्षा 8: इस क्लास में ‘आयुर्वेद: शरीर, मन और पर्यावरण का संतुलन’ चैप्टर के जरिए दिनचर्या (स्वस्थ दैनिक आदतें), ऋतुचर्या (मौसम के अनुसार खानपान) और बैलेंस्ड लाइफस्टाइल का महत्व सिखाया जाएगा।

सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा आयुर्वेद

प्राचीन भारतीय चिकित्सा शैली को सिर्फ स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC) और आयुष मंत्रालय ने इसे कॉलेज और यूनिवर्सिटी शिक्षा में भी शामिल करने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए विशेष मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव के अनुसार, एलोपैथी और आयुष दोनों प्रणालियां एक-दूसरे की पूरक हैं और मिलकर इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर मॉडल तैयार कर सकती हैं। इस पहल से छात्रों को पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली की गहराई समझने का मौका मिलेगा।


भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी शिक्षा

एनईपी 2020 आधुनिक शिक्षा को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना चाहता है। आयुर्वेद को विज्ञान के पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्रों को न केवल प्राचीन भारतीय विज्ञान के बारे में बताया जा सकेगा, बल्कि उनमें इसके प्रति सम्मान बढ़ेगा। इससे उनमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आएगी और वे अधिक जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।

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