CBSE Class 10 Results 2026: कैंसर भी नहीं रोक पाया आरव की उड़ान, 10वीं में 96.6% नंबर से बीमारी को सिखाया सबक

CBSE Class 10 Results 2026: लगन और जुनून का इंसान की क्या स्थान है, ये दिल्ली के आरव वत्स ने दिखाया है। इस उम्र में कैंसर से जूझते हुए उन्होंने 10वीं कक्षा में 96.6% नंबर हासिल किए हैं। उन्होंने अपने इस प्रदर्शन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को भी सबक सिखाया है। आइए जानें उनकी कहानी

अपडेटेड Apr 16, 2026 पर 11:11 AM
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आरव ने कैंसर से जूझते हुए सीबीएसई 10वीं कक्षा रिजल्ट 2026 में 96.6% नंबर हासिल किए।

CBSE Class 10 Results 2026: बोर्ड परीक्षा जिन्हें भी जिंदगी का सबसे कठिन एग्जाम लगती है, उन्हें दिल्ली के आरव वत्स से जरूर सीख लेनी चाहिए। दिल्ली के साकेत स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले आरव वत्स लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा से जूझते हुए सीबीएसई 10वीं कक्षा रिजल्ट 2026 में 96.6% नंबर हासिल किए हैं। ये साबित करता है कि लगन और जुनून हो तो हिमालय पर्वत भी रास्ता दे देता है। सीबीएसई बोर्ड ने बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को 10वीं कक्षा का बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। इस साल सीबीएसई 10वीं कक्षा परिणाम 2026 में पास पर्सेंटेज 93.70% रहा है।

सीबीएसई 10वीं कक्षा रिजल्ट 2026 के घोषित होने के बाद से ढेरों बच्चों के हिम्मत और जुनून की कहानियां सामने आ रही हैं। ऐसी ही प्रेरणा देने वाली कहानी है दिल्ली के महरौली निवासी आरव वत्स की। कैंसर से जारी जंग के बीच उनकी हिम्मत और पक्का इरादा हथियार बने। आरव पिछले दो साल से लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा से जूझ रहे हैं। बीमारी से जूझने के बावजूद, उसने इंटेंसिव मेडिकल ट्रीटमेंट के दौरान लगातार पढ़ाई जारी रखी। इसका नतीजा आज उनके नंबरों के रूप में सबके सामने है। पढ़ाई के प्रति आरव का समर्पण दिखाता है कि कैसे लगातार कोशिश, फोकस और खुद पर भरोसा बड़ी से बड़ी मुश्किल में भी कामयाबी दिला सकता है।

लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा क्या है?

लिम्फोब्लास्टिक लिम्फोमा कैंसर का एक दुर्लभ लेकिन गंभीर रूप है जो शरीर के लिम्फेटिक (इम्यून) सिस्टम पर असर डालता है। यह लिम्फोब्लास्ट सेल्स से शुरू होता है, जो आम तौर पर व्हाइट ब्लड सेल्स में बदल जाते हैं। यह मुख्य रूप से बच्चों और किशोरों को प्रभावित करता है और अक्सर मीडियास्टिनल मास (सीने में गांठ), सांस लेने में दिक्कत और सूजे हुए लिम्फ नोड्स जैसे लक्षणों के साथ दिखता है।

सातवीं कक्षा में चला कैंसर का पता

आरव के पिता डॉ अजय वत्स ने बताया कि आरव जब 7वीं कक्षा में थे, तब उन्हें कैंसर का पता चला। उस दौरान उनके शरीर का हिलना-डुलना, चलना-फिरना बंद कर दिया था। उनका स्पाइन का ऑपरेशन कर प्लेट्स डाली गईं। काफी समय तक बेड पर ही रहे। फिर वॉकर से चलना शुरू किया। उनके जीवन के अगले पांच साल बेहद महत्वपूर्ण हैं।


शिक्षकों की मदद से दूर की हर बाधा

डॉ अजय ने बताया कि आरव की स्कूल की प्रिंसिपल दिव्या भाटिया और सभी टीचरों ने उनका भरपूर साथ दिया। उनकी ऑनलाइन क्लास चली, जिससे पढ़ाई जारी रही। आरव ने कहा कि मैंने सोशल मीडिया में कई अन्य लोगों के बारे में पढ़ा, जो गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इसके बाद भी उन्हें अपने जीवन के संघर्ष को बिल्कुल भी चुनौती नहीं माना। मेरे परिवार, प्रधानाचार्य, शिक्षकों, डॉक्टरों, क्लासमेट सभी ने मेरा बहुत साथ दिया और इस बीमारी से लड़ने में उनका योगदान अतुलनीय है।

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