CBSE Class 12 revaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए री-इवैलुएशन प्रक्रिया आज से शुरू कर दी है। इसके जरिए छात्र अपनी मूल्यांकन की हुई आंसर शीट की स्कैन कॉपी देख सकते हैं, किसी जवाब या उस पर मिले नंबरों पर अपनी चिंता जाहिर कर सकते हैं। इस साल 13 मई को सीबीएसई बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 जारी होने के बाद से ही छात्रों, अभिभावकों और टीचरों के बीच नाराजगी देखने को मिल रही थी।
विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर उम्मीद से कम मार्क्स और नए शुरू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर चिंताएं जाहिर की गई थीं। इसके बाद सीबीएसई बोर्ड ने 17 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा और छात्रों के लिए री-इवैलुएशन प्रक्रिया आज से शुरू करने की घोषणा की थी। जो स्टूडेंट्स अपनी आंसर शीट का रिव्यू करवाना चाहते हैं, वे 19 मई से सीबीएसई के आधिकारिक पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड ने आंसर शीट के वेरिफिकेशन और फोटोकॉपी की फीस भी घटाकर 100 रुपये कर दी है, जिससे कई परिवारों को राहत मिली है।
सीबीएसई के पोर्टल पर करें आवेदन
सीबीएसई के आधिकारिक पोर्टल और रीचेकिंग पोर्टल के जरिए छात्र अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
12वीं कक्षा रीवैल्यूएशन 2026 फीस
बोर्ड ने मूल्यांकन की हुई आंसर शीट की स्कैन कॉपी करवाने की फीस 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दी है। वेरिफिकेशन फीस भी 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दी गई है।
जो छात्र खास सवालों का री-चेक करवाना चाहते हैं, उन्हें हर सवाल के लिए 25 रुपये देने होंगे। बदले हुए फीस स्ट्रक्चर से उन स्टूडेंट्स को मदद मिलने की उम्मीद है जिन्हें पहले यह प्रोसेस बहुत महंगा लगता था।
सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया
सीबीएसई ने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के लिए एक चरणबद्ध प्रक्रिया जारी की है।
ये तारीखें याद रखें छात्र
सीबीएसई बोर्ड ने 19 मई से री-इवैल्यूएशन के लिए अनुरोध स्वीकार करना शुरू कर दिया है। इसके लिए आवेदन 22 मई से शुरू होंगे। छात्र 26 मई से 29 मई के बीच अपनी रीचेक की हुई आंसर शीट देख पाएंगे।
छात्रों को सलाह दी गई है कि स्कैन आंसर शीट पर असहमति जताने से पहले अपनी स्कैन आंसर शीट को ध्यान से देख लें, क्योंकि बोर्ड रिव्यू प्रोसेस के दौरान सिर्फ सबमिट की गई गड़बड़ियों की ही जांच करेगा।
क्यों ध्यान खींच रहा सीबीएसई का यह कदम
इस साल कई छात्रों, अभिभावकों और टीचर्स द्वारा नए डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम के तहत मार्किंग पैटर्न पर सवाल उठाए जाने के बाद री-इवैल्यूएशन प्रोसेस चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। कई छात्रों ने दावा किया कि उनके स्कोर उम्मीद से कम थे, जिससे ज्यादा पारदर्शी समीक्षा प्रक्रिया की मांग उठी।