CBSE Class 9 three language formula: 10वीं के छात्रों को 3 भाषा व्यवस्था से इस साल मिली छूट, 9वीं के छात्र पढ़ सकते हैं दो विदेशी भाषाएं

CBSE 3 language policy: सीबीएसई बोर्ड ने अपनी 3 भाषा व्यवस्था में 9वीं और 10वीं के छात्रों को राहत देने का फैसला किया है। इसमें 10वीं कक्षा के मौजूदा बैच के छात्रों को 3 भाषाएं पढ़ने से छूट दी गई है। वहीं, 9वीं कक्षा के छात्र दो विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं। आइए जानें इसके बारे में

अपडेटेड Jun 29, 2026 पर 3:10 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
इस साल 10वीं कक्षा के छात्रों को 3 भाषा पढ़ने के नियम में छूट देने का फैसला किया गया है।

CBSE 3 language policy: सीबीएसई बोर्ड ने शैक्षिक सत्र 2026-27 से 9वीं और 10वीं कक्षा में 3 भाषा व्यवस्था लागू करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए है। इसके तहत इस साल 10वीं कक्षा के छात्रों को 3 भाषा पढ़ने के नियम में छूट देने का फैसला किया गया है। वहीं, 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक बार की राहत देते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कहा है कि इन्हें 3 भाषाएं पढ़नी होंगी, लेकिन ये छात्र दो विदेशी भाषाएं और एक भारतीय भाषा पढ़ सकते हैं।

बता दें, 15 मई को सीबीएसई बोर्ड ने एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि 1 जुलाई से 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाओं समेत तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। बोर्ड के इस आदेश के खिलाफ कई छात्रों और अभिभावकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद अब बोर्ड ने अपनी 3 भाषा नीति में राहत देने का फैसला करते हुए नया दिशा-निर्देश जारी किया है।

सीबीएसई बोर्ड के अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम सिंह ने कहा, “10वीं कक्षा के मौजूदा बैच को 3 भाषा नीति नहीं माननी होगी। कक्षा 7-9 के मौजूदा बैच को 10वीं कक्षा में जाने पर तीसरी भाषा में बोर्ड एग्जाम देने की जरूरत नहीं होगी।” उन्होंने कहा, "एक बार की छूट के तौर पर, जो स्टूडेंट्स 2026-27 के दौरान पहले से ही 9वीं कक्षा में हैं, वे दो विदेशी (नॉन-नेटिव) भाषाए जारी रख सकते हैं और उन्हें तीसरी भाषा के तौर पर एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी।"

इससे पहले सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को 27 मई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई के 19 अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा दायर की गई लीड पिटीशन में तर्क दिया गया था कि 15 मई के सर्कुलर ने सीबीएसई की बताई गई बात को अचानक बदल दिया, जिससे एकेडमिक प्लानिंग में रुकावट आई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने पॉलिसी को चुनौती देने वाली पिटीशन की जांच करने पर सहमति जताई। बेंच ने सवाल किया कि क्या स्कूलों के पास काफी किताबें, टीचर और इंफ्रास्ट्रक्चर है, और कहा कि ऐसा लगता है कि “मुश्किल, असुविधा और लॉजिस्टिक सपोर्ट के मुद्दे” हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। मामले की सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी।

अप्रैल में, सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से 3-भाषा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और 9वीं कक्षा के लिए गणित और विज्ञान के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की थी। इसके तहत गणित और विज्ञान विषयों को दो स्तरों स्टैंडर्ड और एडवांस्ड स्तर में पढ़ाया जाएगा।

इसके तहत सभी छात्र 80 अंकों की समान परीक्षा देंगे। हालांकि, जो छात्र अधिक दक्षता हासिल करना चाहते हैं, वे एडवांस्ड स्तर की परीक्षा भी दे सकेंगे। सीबीएसई ने कहा था कि नयी व्यवस्था के तहत पहली 10वीं बोर्ड परीक्षा वर्ष 2028 में आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा वर्ष 2026-27 में 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए होगी।


हालांकि, 15 मई को बोर्ड ने स्पष्ट किया था कि विदेशी भाषा चुनने वाले विद्यार्थी ऐसा तभी कर सकेंगे, जब वे कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर चुके हों। ऐसे में विदेशी भाषा या तो तीसरी भाषा के रूप में चुनी जा सकेगी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ी जा सकेगी।

NEET UG 2026 Answer Key: बंद हुई नीट यूजी आपत्ति विंडो, फिजिक्स में एक सवाल ड्रॉप होने से छात्रों को मिलेंगे 4 नंबर

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।