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CBSE's 3-language policy: अंतरिम राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सर्वोच्च अदालत ने पूछा, क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा मान लिया गया है?

CBSE's 3-language policy: सीबीएसई बोर्ड की 3 भाषा नीति के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जहां अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। वहीं, बोर्ड से सवाल किया कि क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा मान लिया गया है? मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 15, 2026 पर 12:59 PM
CBSE's 3-language policy: अंतरिम राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सर्वोच्च अदालत ने पूछा, क्या अंग्रेजी को भारतीय भाषा मान लिया गया है?
अब इस मामले की सुनवाई 22 जुलाई को होगी।

CBSE's 3-language policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों में 6ठी कक्षा से 3 भाषा नीति लागू करने का फैसला किया है। बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की गई है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि यह दोबारा देखने लायक है कि क्या इंग्लिश को देसी भाषा माना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यह हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के संवैधानिक मकसद को आगे बढ़ाने वाला कदम लगता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत तीन-भाषा पॉलिसी को लागू करने को चुनौती देने वाली पिटीशन के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने नहीं दी अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि डिटेल में सुनवाई के बिना ऐसी राहत पर विचार नहीं किया जा सकता। अब इस मामले की सुनवाई 22 जुलाई को होगी। साथ ही कोर्ट ने केंद्र और सीबीएसई को अपने जवाब फाइल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणि में कहा कि देसी भाषाओं के नाम और क्या इंग्लिश को उनमें से एक माना जा सकता है? इस सवाल पर फिर से सोचने की जरूरत हो सकती है।

पिटीशनर्स ने प्रैक्टिकल चुनौतियों को उठाया

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि छात्रों को 22 भाषाओं में से चुनाव करने की सुविधा के बावजूद तीन-भाषा पॉलिसी को लागू करने से गंभीर प्रैक्टिकल चुनौतियां आएंगी। उन्होंने कहा कि स्कूलों को इतनी सारी भाषाओं के लिए काबिल टीचर नियुक्त करने और जरूरी आधारभूत संरचना तैयार करने में मुश्किल होगी। उन्होंने यह भी बताया कि एनसीईआरटी ने 1 जुलाई तक सभी 22 भाषाओं के लिए शिक्षा सामग्री अपलोड करने का वादा किया था, लेकिन अभी सिर्फ तीन भाषाओं के लिए टेक्स्टबुक्स उपलब्ध हैं। पिटीशनर्स ने तर्क दिया कि यह निर्देश तब दिया है जब सीबीएसई ने मौजूदा शैक्षिक सत्र से कक्षा 9 के लिए तीन-भाषा फॉर्मूला जरूरी करने वाला अपना पिछला सर्कुलर वापस ले लिया है।

केंद्र ने दिया नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का हवाला

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