JEE Advanced 2026 Eligibility: क्राइटेरियम A5 के तहत अयोग्य छात्र को हाईकोर्ट ने दी राहत, अब जेईई एडवांस परीक्षा में हो सकेगा शामिल

JEE Advanced 2026 Eligibility: जेईई एडवांस परीक्षा 17 मई को होने वाली है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जोसा काउंसलिंग के नियमों के फेर में उलझे एक 17 साल के छात्र को अंतरिम राहत देते हुए उसे जेईई एडवांस परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। आईए जानें क्या है पूरा मामला

अपडेटेड May 05, 2026 पर 10:37 AM
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कोर्ट ने इस मामले में डीटेल सुनवाई के लिए 25 मई का दिन तय किया है।

JEE Advanced 2026 Eligibility: जेईई एडवांस परीक्षा देश के प्रतिष्ठित और प्रमुख आईआईटी, एनआईटी और आईआईआईटी संस्थानों में प्रवेश का जरिया है। लेकिन कई बार छात्र जोसा काउंसलिंग नियमों में उलझकर इस परीक्षा में बैठने का अवसर खो देते हैं। ऐसे ही एक 17 वर्षीय छात्र को हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी है और अब वह परीक्षा में शामिल होने के लिए पंजीकरण कर सकता है और उसके लिए एडमिट कार्ड भी जारी किया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में डीटेल सुनवाई के लिए 25 मई का दिन तय किया है। उम्मीदवार अगर इसमें हार जाता है, तो उसका परीक्षा परिणाम शून्य हो सकता है।

समझें पूरा मामला

17 साल के इस उम्मीदवार को पिछले साल जेईई एडवांस परीक्षा में सफल होने के बाद आईआईटी गुवाहाटी में इंजीनियरिंग फिजिक्स की सीट प्रदान की गई थी। छात्र ने ऑनलाइन रिपोर्टिंग की और फीस भी जमा कर दी। लेकिन वह अपनी ब्रांच से असंतुष्ट था। अत: उसने 19 जुलाई 2025 को ईमेल के जरिए इस कोर्स में शामिल न होने की सूचना दी। इस छात्र को 2026 की जेईई एडवांस परीक्षा के लिए ‘क्राइटेरियम A5’ के तहत अयोग्य करार दे दिया गया। नियमों के मुताबिक जो छात्र एक बार आईआईटी में सीट स्वीकार कर लेते हैं, वे दोबारा परीक्षा नहीं दे सकते।

छात्र ने रखा अपना पक्ष

छात्र की तरफ से तर्क दिया गया कि जब उसने कॉलेज जॉइन ही नहीं किया तो उसे जेईई एडवांस्ड 2026 परीक्षा देने से अयोग्य क्यों किया जा रहा है ? उसका कहना है कि उसने केवल ऑनलाइन रिपोर्टिंग की थी। कॉलेज जाकर कभी डॉक्यूमेंट्स का ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ नहीं कराया। सीट अलॉटमेंट स्लिप में साफ लिखा था कि फाइनल एडमिशन तभी माना जाएगा जब फिजिकल वेरिफिकेशन सफल होगा।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा


कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि अगर उम्मीदवार को 17 मई 2026 को होने वाली जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बैठने से रोका गया तो उसकी यह याचिका ही अर्थहीन हो जाएगी। जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला बाद में आएगा, लेकिन फिलहाल छात्र का भविष्य बचाना जरूरी है। यह आदेश उन हजारों उम्मीदवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो अक्सर जोसा (JoSAA) काउंसलिंग और पात्रता नियमों (Criterion A5) की उलझनों में फंस जाते हैं।

कोर्ट ने दी अहम टिप्पणी

जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि उम्मीदवार के पास जेईई एडवांस्ड परीक्षा देने के केवल दो ही मौके होते हैं, जिनमें से एक वह 2025 में इस्तेमाल कर चुका है। अगर उसे इस साल बैठने नहीं दिया गया तो उसका करियर हमेशा के लिए प्रभावित होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि इस उम्मीदवार का पक्ष मजबूत है और ‘सुविधा का संतुलन’ (Balance of Convenience) उसके पक्ष में है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 1 हफ्ते के अंदर इस अभ्यर्थी को JEE Advanced 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति दें और एडमिट कार्ड जारी करें।

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