Pilot Training Cost: आसमान में उड़ान भरने का सपना देख रहे हैं, तो पहले जान लें भारत में पायलट ट्रेनिंग का कोर्स कैसे करें, कितना खर्च आएगा और कितना लगेगा समय?

Pilot Training Cost: बहुत से युवा एविएशन या विमानन क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। इसके लिए कुछ योग्यताओं को पूरा करना जरूरी होता है। आइए जानें भारत में पायलट बनने के लिए क्या कोर्स करने पड़ता है, उसमें कितना समय लगता है और कितना खर्च आता है

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 3:35 PM
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भारत में एविएशन सेक्टर में पायलट की मांग में भी बढ़ात्तरी देखने को मिल रही है।

Pilot Training Cost: आसमान में उड़ते जहाज को देखकर लोग काफी रोमांचित होते हैं। इनमें से कुछ उसमें उड़ने का सपना देखते हैं, तो कुछ उसे उड़ाने का। ये ऐसी इच्छा नहीं है, जो पूरी नहीं हो सकती है। हां, इसे पूरा करने के लिए कुछ बेसिक योग्यताएं हैं, जिनके बिना ये सपना बस सपना ही बन कर रह जाता है। आइए जानें भारत में कमर्शियल पायलट बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए? कितने दिन की ट्रेनिंग या पढ़ाई करनी जरूरी होती है और इसमें कितना खर्च आता है?

एविएशन इंडस्ट्री में करियर

विमानन उद्योग देश का तेजी से बढ़ता उद्योग है। कॅरियर के तौर पर देखें तो इसमें संभावनाओं की कमी नहीं है और जरूरत भी अच्छी-खासी है। एविएशन ये ऐसी इंडस्ट्री है, जो समय के साथ बदलती रहती है। भारत में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और इसलिए पायलट की मांग में भी बढ़ात्तरी देखने को मिल रही है।

पायलट बनने के लिए क्या शैक्षिक योग्यता चाहिए?

भारत में पायलट बनने के लिए 12वीं कक्षा कम से कम 50% अंकों के साथ पास होना जरूरी है। 12वीं कक्षा फिजिक्स, मैथ्स और इंग्लिश विषय से छात्र को पास होना चाहिए। हालांकि ये एयरलाइन के अपने मापदंड पर भी निर्भर करता है।

डीजीसीए की सीपीएल परीक्षा पास करना है जरूरी


एविएशन इंडस्ट्री में पायलट बनने के इच्छुक कैंडिडेट को डीजीसीए की सीपीएल परीक्षा देनी होती है। ये परीक्षा साल में चार बार होता है। इसे पास करने वालों की ग्राउंड और फ्लाइंग दो तरह की ट्रेनिंग होती है। ग्राउंड ट्रेनिंग में अभ्यर्थियों को थ्योरिटिकल जानकारियां दी जाती हैं। इसमें मेटरोलॉजी या मौसम विज्ञान, एयर रेगुलेशन, नेविगेशन, रेडियो टेलीफोनी, टेक्निकल जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। इनकी लिखित परीक्षाओं में कम से कम 70 फीसदी नंबर लाने जरूरी हैं।

इसके बाद कैंडिडेट भारत में डीजीसीए से मान्यता प्राप्त फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजंशन (एफटीओ) में दाखिल होते हैं और यहां वो 200 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव लेते हैं। इसके अलावा दूसरा रास्ता होता है कैडेट पायलट प्रोग्राम, जिन्हें एयरलाइन कंपनियां चलाती हैं।

मेडिकल फिटनेस है सबसे जरूरी

पायलट बनने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट होना जरूरी है। इसके लिए डीजीसीएस द्वारा निर्धारित मेडिकल टेस्ट पास करना जरूरी होता है। ज्यादातर एयरलाइंस में कम से कम लंबाई लगभग 153 सेंटीमीटर होनी चाहिए। बहुत कम या बहुत ज्यादा लंबाई एयरलाइंस में मान्य नहीं होती। इसके अलावा आंखों की रोशनी औ सुनने की क्षमता की भी जांच की जाती है। कलर ब्लाइंड अभ्यर्थी इस फील्ड के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते हैं।

कितने तक का खर्चा आता है?

पायलट ट्रेनिंग पर मौजूदा समय में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL), टाइप रेटिंग और एयरलाइन ट्रेनिंग मिलाकर लगभग 60 से 70 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है। यह अलग-अलग इंस्टिट्यूट्स पर निर्भर करता है। इसलिए फाइनेंशियल प्लानिंग पहले से करना बहुत जरूरी है।

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