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Lakshveer offline AI storytelling device: छोटे से लक्षवीर का बड़ा कमाल, 8 साल की उम्र में ऐसी टेक्नोलॉजी बना दी जो बना सकती है ओरिजनल कहानियां

Lakshveer offline AI storytelling device: लक्षवीर की उम्र महज 8 साल है। इतनी कम उम्र में उन्होंने एक ऐसी डिवाइस बनाने का कारनामा कर दिखाया है, जिसे गहरी तकनीकी समझ रखने वाले ही कर सकते हैं। आइए जानें क्या है लक्षवीर की ये डिवाइस जो उन्हें ओरिजनल कहानियां बनाकर सुनाती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 29, 2026 पर 6:32 PM
Lakshveer offline AI storytelling device: छोटे से लक्षवीर का बड़ा कमाल, 8 साल की उम्र में ऐसी टेक्नोलॉजी बना दी जो बना सकती है ओरिजनल कहानियां
आठ साल के लक्षवीर ऐसी टेक्नोलॉजी बना रहे हैं उनके लिए कहानी की किताबें बना सकती है।

Lakshveer offline AI storytelling device: अगर आप मानते हैं कि बड़ी सोच छोटी उम्र में नहीं आ सकती, तो एक बार फिर सोच लीजिए। 8 की उम्र ऐसा ही पड़ाव है, जिसमें बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, रंग-बिरंगी और बड़ी-बड़ी तस्वीरों वाली किताबों में दिल लगा रहे होते हैं। अगर इस मासूम उम्र में कोई बच्चा कहानियों में जीने और रोज नई कहानी सुनने के लिए एक मुकम्मल तकनीक खड़ी कर दे, तो उसे आप क्या कहेंगे? टेक्नोलॉजी जीनियस! अगर हां, तो ये नाम 8 साल के लक्ष्य पर पूरी तरह से सूट करता है।

आठ साल के लक्षवीर ऐसी टेक्नोलॉजी बना रहे हैं उनके लिए कहानी की किताबें बना सकती है। लगभग ₹760 के कम कीमत वाले ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर का इस्तेमाल करके, इस नन्हे इनोवेटर ने एक ऑफलाइन, आवाज से नियंत्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहानी सुनाने वाला उपकरण बनाया है। यह ओरिजिनल कहानियां बना सकता है, उन्हें जोर से पढ़ सकता है और बोले गए कमांड का जवाब दे सकता है। वो भी बिना इंटरनेट से कनेक्ट हुए।

लक्ष्यवीर के इस प्रोजेक्ट ने टेक्नोलॉजी के शौकीनों का ध्यान खींचा है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे कॉम्पैक्ट, ओपन-सोर्स AI मॉडल बेहद सस्ते हार्डवेयर पर भी बखूबी चल सकते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, वाई-फाई या पेड एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) पर निर्भर रहने के बजाय, यह डिवाइस हर काम बहुत छोटे स्तर पर करता है, जिससे यह उन जगहों के लिए सही है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कम है या उपलब्ध नहीं है।

कैसे काम करता है ऑफलाइन AI स्टोरीटेलिंग डिवाइस

प्रोजेक्ट्स बाय लक्ष के को-फाउंडर, लक्ष्यवीर ने इस डिवाइस को एक ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर के आस-पास बनाया और इसे एक INMP441 माइक्रोफोन, एक I2S स्पीकर और एक MAX98357A एम्प्लीफायर के साथ जोड़ा। ये कम्पोनेंट यूजर्स को वॉइस कमांड के जरिए एआई से इंटरैक्ट करने का मौका देते हैं। स्टोरीटेलिंग असिस्टेंट जरूरत के हिसाब से छोटी कहानियां बना सकता है, उन्हें टेक्स्ट-टू-स्पीच टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सुना सकता है, आसान एनिमेशन दिखा सकता है और "प्ले", "पॉज", "रिज्यूम" और "अगली कहानी" जैसे बोले गए निर्देशों का जवाब दे सकता है। अधिकांश एआई असिस्टेंट के उलट, लक्ष्य के प्रोजेक्ट में प्रोसेस का हर चरण डिवाइस पर ही होता है। कोई भी डेटा बाहरी सर्वर पर नहीं भेजा जाता है, और सिस्टम बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करता रहता है।

ओपन-सोर्स AI प्रोजेक्ट को देता है पावर

शुरू से एक लैंग्वेज मॉडल बनाने के बजाय, लक्ष्य ने ESP32 के लिए TinyStories LLM नाम के एक मौजूदा ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को मॉडिफाई किया, जिसे मूल रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपर slvDev ने तैयार किया था। मूल मॉडल को क्लाउड सपोर्ट के बिना सीधे ESP32 हार्डवेयर पर स्टोरीज बनाने के लिए डिजाइन किया गया था।

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