US student visa policy : अमेरिका की स्टूडेंट वीजा पॉलिसी में सख्ती का असर अब छात्रों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर एजुकेशन लोन सेक्टर पर भी दिखने लगा है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक,विदेश में पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाले पैसों यानी आउटवर्ड रेमिटेंस में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अहमदाबाद के यश पटेल का सपना था अमेरिका की बड़ी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेना। लेकिन यश ने अब हर सपना छोड़ दिया है। अमेरिका ने स्टूडेंट वीजा के नियम काफी सख्त बना दिए हैं और यश जैसे हजारों और छात्रों को अगले दो साल तक अमेरिका में पढ़ाई का मौका मिलने की उम्मीद बेहद कम है। यश पटेल ने कहा कि “अब मैं अमेरिका नहीं, बल्कि किसी दूसरे देश में पढ़ाई करने जाने की तैयारी कर रहा हूं। अमेरिका जाना अब मुमकिन नहीं लगता।”
2025 में फॉरेन एजुकेशन लोन में 30 से 50 फीसदी तक की गिरावट
वीजा पर सख्ती का असर पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर साफ दिख रहा है। अगस्त में शुरू होने वाले फॉल एडमिशन सीजन के दौरान विदेश में पढ़ाई के लिए आउटवर्ड रेमिटेंस 23 फीसदी घटकर 41.6 करोड़ डॉलर से 31.9 करोड़ डॉलर पर आ गई। जबकी जनवरी से शुरू स्प्रिंग एडमिशन सीजन में आउटवर्ड रेमिटेंस 18 फीसदी गिरकर 44.9 करोड़ डॉलर से 36.8 करोड़ डॉलर रह गई। इसमें छात्रों की ट्यूशन फीस के साथ-साथ रहने और खाने-पीने जैसे खर्च भी शामिल हैं। एजुकेशन लोन कंपनियों और NBFCs का कहना है कि 2025 में फॉरेन एजुकेशन लोन में 30 से 50 फीसदी तक की गिरावट आई है।
अमेरिका से जुड़े एजुकेशन वॉल्यूम में करीब 60% की गिरावट
ज्ञानधन (GyanDhan) के CEO & को-फाउंडर अंकित मेहरा ने कहा "अमेरिका से जुड़े एजुकेशन वॉल्यूम में करीब 60% की गिरावट आ चुकी है। अमेरिका में जारी अनिश्चितता के चलते, हमारे पार्टनर्स को अगले फॉल सीजन में और गिरावट की आशंका है"।
छात्र अमेरिका की जगह यूके, फ्रांस, जर्मनी और पूर्वी यूरोप जैसे देशों का कर रहे रुख
हालांकि अब छात्र अमेरिका की जगह यूके, फ्रांस, जर्मनी और पूर्वी यूरोप जैसे देशों का रुख कर रहे हैं, लेकिन इंडस्ट्री जानकारों का कहना है कि अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से आने वाला वॉल्यूम सबसे बड़ा होता था, जिसकी भरपाई दूसरे देशों से करना आसान नहीं है। अगले एक से दो साल तक एजुकेशन लोन की नई डिस्बर्समेंट सुस्त रहने की पूरी संभावना है।