बिहार के पटना जिले का मोकामा विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से बाहुबलियों की राजनीति का अखाड़ा रहा है, जहां दो बाहुबलियों- अनंत सिंह और सूरजभान सिंह - का दबदबा रहा है। अपने आपराधिक इतिहास और मजबूत स्थानीय प्रभाव के लिए जाने जाने वाले, दोनों नेताओं ने इस इलाके की राजनीतिक कहानी को आकार दिया है, जिससे यह बिहार की सबसे अस्थिर लेकिन चुनावी रूप से महत्वपूर्ण सीटों में से एक बन गई है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही, मोकामा एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में है।
ऐतिहासिक टकराव: दुश्मनी की जड़ें
अनंत सिंह और सूरजभान सिंह के बीच दुश्मनी 2000 के बिहार विधानसभा चुनावों से चली आ रही है। 'दादा' के नाम से मशहूर सूरजभान ने अनंत के बड़े भाई दिलीप सिंह को हराकर पहली बार मोकामा सीट पर कब्जा किया। इस हार ने एक लंबे राजनीतिक विवाद के बीज बो दिए।
2005 में, अनंत सिंह ने सूरजभान के प्रभाव से यह सीट छीन ली, जिससे उन्हें 'छोटे सरकार' उपनाम मिला और वे कई चुनावों में इस सीट पर बने रहे। दशकों से, दोनों नेताओं पर आपराधिक आरोप लगे हैं, उन्हें जेल की सजांएं मिली हैं और उन्हें अयोग्य ठहराया गया है, फिर भी वे पारिवारिक प्रतिनिधियों और वफादार समर्थकों के जरिए मोकामा पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। इस व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने मोकामा की छवि बाहुबल की राजनीति के गढ़ के रूप में स्थापित कर दी है।
अनंत सिंह: मोकामा के 'छोटे सरकार'
अनंत सिंह ने मोकामा सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखी है, चाहे वह किसी भी पार्टी से जुड़े हों- JDU से लेकर निर्दलीय और RJD तक। 2022 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद भी उनका प्रभाव कम नहीं हुआ, क्योंकि उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव में यह सीट जीती थी। पटना हाई कोर्ट से बरी होने के बाद, सिंह फिर से चुनाव मैदान में हैं और अपना दबदबा फिर से हासिल करने की कोशिश में हैं।
सूरजभान सिंह: परिवार के जरिए 'दादा' की वापसी
सूरजभान सिंह का परिवार अपनी पत्नी वीणा देवी के जरिए, जो RJD के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं, अपना प्रभाव बनाए हुए है। अनंत सिंह और वीणा देवी के बीच प्रतिद्वंद्विता अब भी जारी है, जिससे दशकों पुराना झगड़ा जारी है और मोकामा बिहार के राजनीतिक नाटक का केंद्र बिंदु बन गया है।
मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या से तनाव बढ़ गया है। कथित तौर पर प्रतिद्वंद्वी काफिलों के बीच झड़पों के दौरान गोली मारकर और कुचलकर मारे गए यादव की मौत ने हिंसक राजनीति को लेकर चिंताएं फिर से जगा दी हैं। इस घटना के बाद भारी पुलिस बल तैनात किया गया और अनंत सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गईं, जिसकी प्रशांत किशोर समेत कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने निंदा की है।