Bihar Election: राहुल गांधी को कैसे आई सीताराम केसरी की याद? कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के परिवार ने उठाए ये सवाल

Bihar Assembly Elections 2025: सीताराम केसरी के परिवार का दर्द आज भी गहरा है। सीताराम केसरी के पोते संतोष केसरी ने News18 से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी हमेशा मेरे दादाजी का जिक्र करते रहे हैं। भगवान का शुक्र है कि राहुल गांधी को 25 साल बाद उनकी याद आई, लेकिन यह भी साफ है कि यह चुनाव का वक्त है

अपडेटेड Oct 25, 2025 पर 11:02 PM
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कांग्रेस को अपने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी की याद क्या आई मामला सियासी हो गया।

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार के चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस को अपने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी की याद क्या आई मामला सियासी हो गया। सीताराम केसरी की पच्चीसवीं पुण्यतिथि के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई जिसमें मुख्य रूप से राहुल गांधी पहुंचे। राहुल गांधी ने सीताराम केसरी की तस्वीर पर फूल चढ़ाए। बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सीताराम केसरी की पुण्यतिथि पर पिछले 25 साल में शायद पहला अवसर है, जब राहुल गांधी ने उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाए।

पीएम मोदी ने साधा निशाना

दरअसल, सीताराम केसरी की 25वीं पुण्यतिथि के बहाने बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया और कहा, ‘‘कांग्रेस में एक परिवार है जो देश का सबसे भ्रष्ट परिवार है। उन्होंने अपने ही पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी को बाथरूम में बंद कर दिया था और फिर सड़क पर फेंक दिया था। ऐसे लोग लोकतंत्र और सम्मान की बात करते हैं।’’

परिवार ने कही ये बात


सीताराम केसरी के परिवार का दर्द आज भी गहरा है। सीताराम केसरी के पोते संतोष केसरी ने News18 से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी हमेशा मेरे दादाजी का जिक्र करते रहे हैं। भगवान का शुक्र है कि राहुल गांधी को 25 साल बाद उनकी याद आई, लेकिन यह भी साफ है कि यह चुनाव का वक्त है मैं कभी नहीं भूल सकता कि कांग्रेस के एक पूर्व अध्यक्ष के साथ कैसा व्यवहार किया गया था। मैं खुद वहां मौजूद था... उन्हें कमरे में बंद कर दिया गया था, और यहां तक कि उनकी धोती जलाने की कोशिश भी की गई थी। आज कांग्रेस की किसी किताब या दस्तावेज में उनका नाम या तस्वीर तक नहीं है यह बेहद दुखद है।”

वहीं अपने घर के पास पास की एक किराना दुकान पर बैठे सीताराम केसरी के दूसरे पोते सचिन केसरी ने News18 से कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार सीताराम जी को याद किया है, लेकिन पिछले 20 सालों में कांग्रेस के किसी नेता ने उनकी कोई खबर नहीं ली। अब अचानक राहुल गांधी उनका नाम लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंच गए। मुझे लगता है कि यह सब चुनाव से जुड़ा कदम है। लेकिन दानापुर के लोग कभी नहीं भूलेंगे कि एक OBC नेता सीताराम केसरी के साथ कांग्रेस ने कैसा व्यवहार किया था।”

कांग्रेस पर लगते रहे हैं ये आरोप 

सीताराम केसरी का अपनी ही पार्टी से अलग होना एक कड़वा अनुभव था। 1998 में सोनिया गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने के लिए जोरदार प्रयास किए गए, और इसी दौरान सीताराम केसरी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। यह कदम उनके खराब प्रदर्शन और 1998 के चुनावों में पार्टी की हार को वजह बताकर उठाया गया था।

लेकिन विडंबना यह रही कि सोनिया गांधी को इस हार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। जिन्होंने उस चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार भी किया था। यह साफ था कि केसरी को हटाने का फैसला सोनिया गांधी को नेतृत्व सौंपने के लिए किया गया। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सीताराम केसरी ने अपने हटाए जाने का विरोध किया और सीनियर नेताओं और सोनिया गांधी के खिलाफ बगावत की कोशिश की थी। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय उन्हें दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय के बाथरूम में बंद कर दिया गया था, जिससे यह घटना पार्टी के इतिहास में एक शर्मनाक अध्याय बन गई।

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