कहते हैं अंत भला तो सब भला। बीजेपी को बहुमत मिल गया। लेकिन चुनावों के 15 दिन पहले तक तो लगता था मानों केजरीवाल को कोई टक्कर नही दे पा रहा है। जमीन पर बीजेपी नजर नहीं आ रही थी। जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल ने एक एक विधानसभा क्षेत्र मे जनसंपर्क का काम पूरा कर लिया था। सिलसिलेवार आम आदमी पार्टी ने विधान सभा के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी कर लीड भी ले ली थी। ऐसा लगने लगा था कि केजरीवाल का कोर वोट बैंक उनसे छिटका नही है।
