पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले महामुकाबले की घड़ी नजदीक आ गई है। 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से पहले विभिन्न सर्वे एजेंसियों ने ओपिनियन पोल सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में VoteVibe का ‘वोट ट्रैकर’ ओपिनियन पोल सामने आया है। ‘वोट ट्रैकर’ ओपिनियन पोल को सीएनएन-न्यूज18 पर जारी किया गया है। इस ओपिनियन पोल के मुताबिक, ममता बनर्जी एक बार फिर पश्चिम बंगाल में सरकार बना सकती हैं, लेकिन इस बार उनकी सीटें कम हो सकती हैं। 294 सीटों वाली विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस को 174 से 184 सीटें मिल सकती हैं। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 148 सीटों का है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की स्थिति पहले से मजबूत होती दिख रही है और उसे 108 से 118 सीटें मिलने का अनुमान है। ओपिनियन पोल के अनुसार, कांग्रेस और सीपीएम जैसी अन्य पार्टियां इस बार भी बड़ी चुनौती नहीं दे पाएंगी और उन्हें सिर्फ 0 से 4 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
VoteVibe के 23 मार्च को जारी पिछले ओपिनियन पोल में तृणमूल कांग्रेस के लिए 184-194 सीटों और भारतीय जनता पार्टी के लिए 98-108 सीटों का अनुमान लगाया गया था। लेकिन ताज़ा सर्वे में बीजेपी की संभावित सीटें बढ़ाई गई हैं, जबकि टीएमसी की सीटों का अनुमान थोड़ा कम किया गया है। साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 215 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं। हालांकि बीजेपी उस समय ममता बनर्जी की जीत को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाई थी, लेकिन यह चुनाव बीजेपी के लिए अहम साबित हुआ। इससे पहले राज्य में उसकी मौजूदगी काफी सीमित थी, लेकिन इस चुनाव के बाद उसकी स्थिति मजबूत हुई।
अगर ये ताज़ा अनुमान सही साबित होते हैं, तो पश्चिम बंगाल में एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस की सरकार बन सकती है। हालांकि, इस बार उसे भारतीय जनता पार्टी के रूप में ज्यादा मजबूत विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, क्षेत्रवार आंकड़ों से भी कड़े मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं। मेदिनीपुर में टीएमसी को 22–24 और बीजेपी को 32–34 सीटें मिल सकती हैं। प्रेसिडेंसी क्षेत्र में टीएमसी को 75–77, बीजेपी को 31–33 और अन्य को 0–2 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, मालदा में टीएमसी को 31–33, बीजेपी को 15–17 और अन्य को 0–2 सीटें मिल सकती हैं। ये इलाके ऐसे माने जा रहे हैं, जहां मुकाबला बेहद कड़ा होगा और अंतिम नतीजों पर इनका बड़ा असर पड़ सकता है।
सर्वे के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में अगले मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी सबसे आगे हैं। उन्हें 46.4% लोगों का समर्थन मिला है। उनके बाद शुभेंदु अधिकारी दूसरे स्थान पर हैं, जिन्हें 34.9% वोट मिले हैं। वहीं, अधीर रंजन चौधरी को 3.2% और मोहम्मद सलीम को 5.0% लोगों का समर्थन मिला है। इसके अलावा, करीब 5.5% लोग ऐसे हैं जिन्होंने या तो किसी अन्य विकल्प को चुना या अपनी राय साफ तौर पर नहीं बताई।
चुनाव के मुख्य मुद्दे क्या हैं?
पश्चिम बंगाल में वोटरों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा नौकरियों की कमी और विकास की धीमी रफ्तार है। सर्वे में 35.1% लोगों ने इसे सबसे अहम समस्या बताया है। इसके बाद कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को 18.5% लोगों ने बड़ा मुद्दा माना। वहीं स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को 17.0%, महंगाई को 9.0% और अन्य मुद्दों को 9.7% लोगों ने अहम बताया। वहीं, युवा साथी योजना जैसी योजनाओं को लेकर भी लोगों में संदेह नजर आ रहा है। सर्वे में 53.6% लोगों का मानना है कि ये योजनाएं बेरोजगारी की समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाएंगी।
पश्चिम बंगाल में धर्म और जाति के आधार पर वोटिंग का रुझान साफ नजर आता है। सर्वे के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय का झुकाव तृणमूल कांग्रेस की ओर ज्यादा है और करीब 60.9% लोग उसे समर्थन दे रहे हैं। वहीं, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के वोटर भारतीय जनता पार्टी की ओर ज्यादा झुके हुए हैं, जहां दोनों वर्गों में करीब 50% समर्थन बीजेपी को मिल रहा है। इसके अलावा, ऊंची जाति के हिंदू मतदाताओं में भी बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है—करीब 46.8% लोग बीजेपी के साथ हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 35.4% समर्थन मिला है।