दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज अक्सर अपने बेबाक और कई बार विवादास्पद बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ 'रामायण' को लेकर एक ऐसी टिप्पणी कर दी है, जिसने न केवल सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया है, बल्कि अब वे कानूनी पचड़े में भी फंस गए हैं। उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एक क्रिमिनल केस दर्ज किया गया है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
यह पूरा मामला एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ, जहां प्रकाश राज ने रामायण का जिक्र करते हुए उसे एक मजाकिया अंदाज में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के वनवास के दौरान का एक काल्पनिक किस्सा सुनाया, जिसमें उन्होंने GST और नॉर्थ-साउथ डिबेट जैसे आधुनिक विषयों को जोड़ दिया।
> "जब राम और लक्ष्मण दक्षिण की तरफ आ रहे थे, तब उन्हें भूख लगी। लक्ष्मण ने कुछ फल तोड़े, तो रावण और शूर्पणखा वहां आ गए। जब पैसों की बात हुई, तो शूर्पणखा ने हिसाब लगाकर 2000 डॉलर का बिल थमा दिया और उसमें GST भी जोड़ दिया।" उन्होंने आगे मजाक में कहा कि रावण ने उन्हें डिस्काउंट देने की पेशकश की और पैसे न होने पर बदले में काम (पेड़ लगाने) की शर्त रखी। इस कहानी के दौरान उन्होंने लक्ष्मण के लिए 'लकी' जैसा शब्द इस्तेमाल किया और रावण-शूर्पणखा को जमीन का मालिक बताया।
हिंदी थोपने और बीफ फेस्टिवल पर भी दिया बयान
कहानी के साथ-साथ प्रकाश राज ने उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच चल रहे भाषाई विवाद पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण आने वाले लोग उन पर हिंदी न थोपें। इसके अलावा, उन्होंने खान-पान की स्वतंत्रता पर बात करते हुए कहा कि वे 'बीफ फेस्टिवल' भी मनाएंगे और कोई उन्हें रोक नहीं सकता।
दर्ज हुई शिकायत और जनता का गुस्सा
जैसे ही इस बयान का वीडियो वायरल हुआ, लोगों का गुस्सा भड़क उठा। सोशल मीडिया पर #BoycottPrakashRaj ट्रेंड होने लगा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रकाश राज ने जानबूझकर हिंदू आस्था का मजाक उड़ाया है और रामायण के पात्रों को गलत तरीके से पेश कर करोड़ों लोगों की भावनाओं का अपमान किया है।
क्रिमिनल केस दर्ज होने के बाद अब प्रकाश राज की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कई लोग तो अब उन्हें मशहूर डायरेक्टर एसएस राजामौली की अगली फिल्म 'वाराणसी' से बाहर करने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अपनी संस्कृति का सम्मान करने के नाम पर किसी दूसरी संस्कृति का अपमान करना कतई स्वीकार्य नहीं है।