Shekhar Suman: 14 साल बाद पर्दे पर लौटेगा शेखर सुमन का 'मूवर्स एंड शेकर्स' वाला अंदाज, बेटे अध्ययन ने तैयार किया नया शो!

Shekhar Suman New Talk Show: दिग्गज अभिनेता शेखर सुमन पूरे 14 साल बाद अपने नए टॉक शो 'शेखर टुनाइट' के साथ पर्दे पर लौट रहे हैं, जिसका पूरा कॉन्सेप्ट उनके बेटे अध्ययन सुमन ने तैयार किया है।

अपडेटेड May 17, 2026 पर 3:10 PM
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नब्बे के दशक में टेलीविजन की दुनिया में अपने बेबाक अंदाज और जबरदस्त हाजिरजवाबी से दर्शकों का दिल जीतने वाले अभिनेता शेखर सुमन एक बार फिर धमाका करने के लिए तैयार हैं। पूरे 14 साल के लंबे इंतजार के बाद शेखर सुमन अपने नए टॉक शो 'शेखर टुनाइट' के साथ वापसी कर रहे हैं। कभी छोटे पर्दे पर 'मूवर्स एंड शेकर्स' के नाम से मशहूर रहा यह शो इस बार नए रंग-रूप और नए नाम के साथ दर्शकों के सामने आएगा। दिलचस्प बात यह है कि इस शो के पीछे की असली सोच किसी बाहरी टीम की नहीं, बल्कि उनके अपने बेटे और अभिनेता अध्ययन सुमन की है।

पिता-पुत्र के बदलते रिश्तों की एक खूबसूरत झलक

शेखर सुमन पिछले चार दशकों से कैमरे के सामने अपनी कला का जादू बिखेर रहे हैं। उन्होंने साल 2014 में आई फिल्म 'हार्टलेस' में अपने बेटे अध्ययन को निर्देशित किया था। लेकिन समय का पहिया घूमा और अब शेखर अपने बेटे के बनाए कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं। इस खूबसूरत बदलाव पर बात करते हुए शेखर सुमन बेहद भावुक और गर्वित नजर आए। उन्होंने कहा, "यह एक पिता के लिए बहुत गर्व की बात है। जब बेटा काबिल हो जाए, तो पिता का सिर ऊंचा हो जाता है। अध्ययन के अंदर यह हुनर हमेशा से था, बस सही वक्त आने पर उसने इसे पहचाना है।"


अफवाहों पर बेबाकी से बोले शेखर सुमन

पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर अध्ययन सुमन को लेकर कई तरह की नकारात्मक खबरें और आत्महत्या जैसी झूठी अफवाहें उड़ाई गईं। इस पर एक पिता का दर्द बयां करते हुए शेखर ने कहा कि परिवार के लिए ऐसी बातें पढ़ना बेहद तकलीफदेह होता है। हालांकि, अध्ययन ने इन मुश्किलों का सामना बहुत जिंदादिली से किया है। शेखर ने कहा, "ईश्वर ने उसे बहुत हुनर दिया है, लेकिन किसी भी कलाकार के लिए सही मौका मिलना सबसे जरूरी होता है। जब तक मौका नहीं मिलेगा, कोई अपनी प्रतिभा कैसे साबित करेगा।"

सोशल मीडिया के दौर में व्यंग्य और सच की चुनौती

आज के दौर में जब सोशल मीडिया पर लोग बहुत जल्दी संवेदनशील और आक्रामक हो जाते हैं, तब एक टॉक शो में राजनीति और समाज पर व्यंग्य करना कितना सुरक्षित है? इस सवाल पर शेखर सुमन का मानना है कि सच कहना हमेशा मुमकिन है, बशर्ते आपका तरीका सही हो। अगर आप चीजों को सनसनीखेज बनाने के बजाय सच्चाई के साथ पेश करेंगे, तो किसी को बुरा नहीं लगेगा।

हालांकि, टीवी चैनलों की पाबंदियों से बचने के लिए शेखर इस शो को यूट्यूब पर लेकर आ रहे हैं। उनका कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन्हें कोई यह नहीं बताएगा कि उन्हें क्या बोलना है और कैसे बोलना है।

'ना' कहने की ताकत ने बनाए रखा चार दशक का सफर

इंडस्ट्री में अपनी लंबी पारी का राज खोलते हुए शेखर ने बताया कि एक अभिनेता की सबसे बड़ी ताकत उसकी 'ना' कहने की क्षमता होती है। पैसों के लालच में खराब रोल स्वीकार करने के बजाय उन्होंने हमेशा काम की क्वालिटी को तवज्जो दी, भले ही इसके लिए उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा हो। यही वजह है कि आज चार दशक बाद भी वह 'मिर्जा' नाटक (गालिब के रूप में), फिल्म 'जनादेश', 'रिपोर्टिंग लाइव' और वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स में सक्रिय हैं।

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