बॉलीवुड के 'पावरहाउस' कहे जाने वाले रणवीर सिंह आज जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचने का सपना हर उभरता हुआ कलाकार देखता है। हाल ही में उनकी फिल्म 'धुरंधर' और उसके सीक्वल की जबरदस्त कामयाबी ने उन्हें एक बार फिर बॉक्स ऑफिस का राजा बना दिया है। लेकिन इस चकाचौंध के पीछे असफलता और अंधेरी रातों का एक लंबा दौर रहा है, जिसे अभिनेता ने एक पुराने साक्षात्कार में साझा किया था।
जब उम्मीदें टूटने लगी थीं
रणवीर सिंह ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि एक वक्त ऐसा भी था जब उनके पास कोई काम नहीं था। उन्होंने साझा किया, "एक समय था जब कोई उम्मीद बाकी नहीं रह गई थी। हफ़्तों और महीनों तक फोन की घंटी नहीं बजती थी। मैं मूर्ख था जो फिर भी डटा रहा, लेकिन शायद वही पागलपन आज काम आया।" रणवीर के मुताबिक, इंडस्ट्री में बाहरी व्यक्ति होने के नाते उन्होंने उस दर्द को करीब से महसूस किया है जब आपको अपनी काबिलियत साबित करने का मौका तक नहीं मिलता।
आज के दौर के युवाओं और संघर्ष कर रहे कलाकारों को सलाह देते हुए रणवीर ने कहा कि जीवन में 'फेलियर' जैसी कोई चीज नहीं होती, केवल सबक होते हैं। उनका मानना है कि जो अनुभव हम अपने कठिन समय में प्राप्त करते हैं, वही हमें एक बेहतर कलाकार और इंसान बनाते हैं। रणवीर ने जोर देकर कहा कि मौलिकता कभी भी दूसरों की नकल न करें, अपनी असलियत को अपनी ताकत बनाएं।
किरदारों में ढूंढते हैं खुद को
रणवीर ने बताया कि 'गली बॉय' का मुराद हो या '83' के कपिल देव, वह उन किरदारों के प्रति अधिक सहानुभूति महसूस करते हैं जो शून्य से शिखर तक पहुंचते हैं। इसका कारण यह है कि उनकी खुद की असल जिंदगी भी एक 'अंडरडॉग' की कहानी रही है। वह अपने अभिनय में उसी भावनात्मक सच और पुराने अनुभवों को पिरोते हैं, ताकि दर्शक उससे जुड़ाव महसूस कर सकें।
आज जब 'धुरंधर' की सफलता का जश्न मनाया जा रहा है, रणवीर की ये बातें याद दिलाती हैं कि सफलता का स्वाद तभी मीठा लगता है जब आपने असफलता का कड़वा घूंट पिया हो। रणवीर सिंह की यह यात्रा न केवल फिल्मी दुनिया के लिए, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। उनकी कहानी सिखाती है कि अगर आप अपने शिल्प के प्रति ईमानदार हैं, तो देर-सबेर दुनिया आपकी प्रतिभा का लोहा जरूर मानेगी।