Anil Kapoor: अनिल कपूर अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल ज़िंदगी के बीच शानदार तरीके से तालमेल बिठाते नज़र आते हैं। लेकिन सच तो यह है कि जो दिखता है,असलियत उससे कहीं अलग होती है। फिल्म इंडस्ट्री के 'डैडी कूल' ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में खुलकर माना कि जब उनके बच्चे बड़े हो रहे थे, तब वे ज़्यादातर घर पर नहीं होते थे। सुनीता ने उन्हें एक 'सिंगल' पेरेंट की तरह पाला है। 'थार' एक्टर ने बताया कि उन्हें अपनी बेटियों के मुकाबले अपने बेटे के साथ ज़्यादा समय बिताना चाहिए था।
एक्टर ने कहा कि मैं शायद ही कभी घर पर होता था। अगर मेरे बच्चे मेरे बारे में अच्छी बातें कहते हैं, तो मुझे खुशी होती है कि मैंने उनकी परवरिश अच्छे से की है। लेकिन एक पिता के तौर पर, मैं और भी बेहतर हो सकता था। मुझे उनके साथ और ज़्यादा समय बिताना चाहिए था। कई मायनों में, सुनीता ने एक सिंगल पेरेंट की तरह ही भूमिका निभाई है। मैं घर पर तो होता था, लेकिन उस तरह से नहीं, जैसा एक पिता को होना चाहिए।
कपूर ने आगे बताया कि उन्हें अपने बच्चों के डेली लाइफ के बारे में ज़्यादा कुछ पता नहीं होता था, क्योंकि उनकी पत्नी ही उन्हें बच्चों की ज़िंदगी से जुड़ी छोटी-मोटी बातें बताती रहती थीं। मुझे मुश्किल से ही पता होता था कि वे किस क्लास में हैं। मुझे उनके जन्मदिन याद नहीं रहते थे, मेरी पत्नी मुझे याद दिलाती थी। वे मुझसे पूछते थे, ‘मेरा जन्मदिन कब है?’ और मैं एकदम ब्लैंक हो जाता था। लेकिन वे बड़े होकर बहुत ही शानदार और खुशमिजाज इंसान बने हैं।
हालांकि एक्टर ने कहा कि वे पीछे मुड़कर नहीं देखते और उन्हें कोई पछतावा नहीं है। मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैं ऐसा इंसान नहीं हूं, जो अतीत में ही उलझा रहे। मैं आगे बढ़ जाता हूं क्योंकि मुझे मज़बूत रहना है। अगर मैं ज़्यादा सोचने लगूं या पछताने लगूं, तो यह मेरे परिवार के लिए अच्छा नहीं होगा।
अनिल कपूर ने ये भी कहा कि भगवान ने मुझे सब कुछ दिया है। छोटी-छोटी बातों पर पछतावा क्यों करना? वे अच्छा कर रहे हैं, खुश हैं, अपनी ज़िंदगी में सेटल हैं, और परिवार और करियर दोनों पर ध्यान दे रहे हैं। इसलिए, कोई पछतावा नहीं। हां बस मुझे लगता है कि मुझे अपनी बेटियों के मुकाबले अपने बेटे के साथ ज़्यादा समय बिताना चाहिए था।
एक्टर ने कहा कि कभी-कभी एक बेटे को अपने पिता की ज़्यादा ज़रूरत होती है। बेटियों का अक्सर अपनी मां के साथ एक खास रिश्ता होता है। एक बेटे को शायद पिता जैसी किसी हस्ती की ज़्यादा ज़रूरत हो, लेकिन मैं वहां मौजूद नहीं था।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका उनके बेटे पर कोई असर पड़ा है, तो कपूर ने सोच-समझकर जवाब दिया, “मुझे कैसे पता होगा? मैं तो अभी भी सीख ही रहा हूं। हम दोस्त हैं, और कभी-कभी मैं सोचता हूं—क्या सिर्फ़ दोस्त बनकर रहना सही था? मैंने कभी एक सख़्त पिता बनने की कोशिश नहीं की। शायद वह एक ग़लती थी। मैं एक पिता के बजाय एक दोस्त के तौर पर उनसे ज़्यादा जुड़ाव महसूस करता हूं। ऐसे भी पल आते हैं जब मैं कमज़ोर या भावुक महसूस करता हूं। मैं असल में ऐसा ही हूं।
कपूर ने अपने बच्चों में आए संस्कारों के साथ परवरिश का श्रेय अपनी पत्नी, सुनीता कपूर को दिया। एक्टर ने कहा कि अगर आप देखें कि मेरी बेटियां कैसी हैं, तो इसका श्रेय ज़्यादातर उन्हीं को जाता है। उनका आत्मविश्वास, ईमानदारी और उनका अपना अलग व्यक्तित्व यह सब उन्हीं से आया है। अनिल कपूर की शादी सुनीता कपूर से 1984 में हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं- सोनम, रिया और हर्षवर्धन।