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Asha Bhosle Death: खुशी से लेकर उदासी तक... हर एहसास की आवाज हुई खामोश! सुरों की दुनिया में अमर हुईं आशा भोसले

Asha Bhosle Death: संगीत को अपने सुरों से अमर करने वाली आशा भोसले ने 'पिया तू अब तो आजा' और 'दम मारो दम' जैसे गानों ने उनकी बेजोड़ बहुमुखी प्रतिभा को सामने रखा। उनकी आवाज में मादकता भी थी, शरारत भी, विद्रोह भी था, प्रेम भी और दर्द भी लेकिन हर बार उसमें भावों की गहराई थी

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Apr 12, 2026 पर 5:12 PM
Asha Bhosle Death: खुशी से लेकर उदासी तक... हर एहसास की आवाज हुई खामोश! सुरों की दुनिया में अमर हुईं आशा भोसले
Asha Bhosle Death: आशा भोसले का रविवार को मुंबई के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया

Asha Bhosle Death: खुशी से लेकर उदासी भरे नगमों तक और पॉप से लेकर गजलों तक, हर संगीत को अपने सुरों से अमर करने वाली आशा भोसले के निधन के साथ ही भारतीय संगीत की वह बहुरंगी आवाज खामोश हो गई। उन्होंने पीढ़ियों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया। अपनी अनूठी आवाज से हिंदी पार्श्व गायन में अलग मुकाम हासिल करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं।

आशा भोसले ने अपनी बहन एवं महान गायिका लता मंगेशकर की छाया में रहकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। दोनों बहनों ने मिलकर करीब सात दशक तक हिंदी पार्श्वगायन को अपने सुरों से समृद्ध किया। वह एक ऐसे भारत की पहचान बनीं, जो बदलते समय के साथ दुनिया से कदमताल कर रहा था।

लता और आशा दोनों ऐसी आवाजें थीं, जिन्होंने पूरे उपमहाद्वीप पर राज किया। ऐसी साझा पहचान बनाई, जो सीमाओं से परे थी। यह संयोग ही है कि संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली दोनों बहनों ने 92 वर्ष की आयु में ही दुनिया को रविवार (12 अप्रैल) के दिन अलविदा कहा। बड़ी बहन लता मंगेशकर को पहले शोहरत मिली। लेकिन जिंदादिल आशा ने भी जल्द ही अपनी अलग जगह बना ली और अपनी जीवंतता एवं अद्भुत बहुमुखी प्रतिभा से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।

आशा भोसले ने 2023 में अपने 90वें जन्मदिन से पहले पीटीआई से कहा था, "हमारी सांस नहीं होती, तो आदमी मर जाता है। मेरे लिए संगीत मेरी सांस है। मैंने अपनी जिंदगी इसी सोच के साथ बिताई है।" रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाली आशा भोसले की बहुरंगी आवाज ने एक ओर जहां श्रोताओं को 'आजा, आजा' जैसे जोशीले गीत पर थिरकने को मजबूर किया, तो दूसरी ओर 'जुस्तजू जिसकी थी' जैसे शास्त्रीय विधा वाले गीतों के साथ उन्हें भावनाओं की गहराई में उतारा।

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