Cannes 2026: कान्स फिल्म फेस्टिवल में स्टैंडिंग ओवेशन मिलना बड़ी बात मानी जाती हैं। फिल्म निर्माताओं, अभिनेताओं और निर्माताओं के लिए, ग्रैंड थिएटर ल्यूमियर के अंदर तालियों की गड़गड़ाहट के वे खास पल अक्सर इस बात का संकेत होते हैं कि फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों पर गहरा प्रभाव डाला है। हाल के सालों में, भारतीय सिनेमा ने कान्स में ऐसे कई ऐतिहासिक क्षण देखे हैं। इंटीमेट ड्रामा से लेकर जॉनर डिफाइन स्टोरी तक, इन फिल्मों ने न केवल वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि उन्हें लंबे समय तक स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला। यहां चार हालिया भारतीय फिल्मों पर एक नज़र है, जिन्हें कान्स में सबसे लंबे समय तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला है।
नीरज घायवान द्वारा निर्देशित फिल्म 'होमबाउंड' को कान्स 2025 में नौ मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला, जिससे यह हाल के सालों में सबसे चर्चित भारतीय प्रीमियर में से एक बन गई। फिल्म में ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जाह्नवी कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। कहानी उत्तर भारत के एक छोटे से गांव के दो बचपन के दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके सपने और रिश्ते... बदलती परिस्थितियों के कारण मुश्किलों का सामना करते हैं। करण जौहर के समर्थन और मार्टिन स्कॉर्सेसी के कार्यकारी निर्माता के रूप में जुड़े होने के कारण, फिल्म ने वैश्विक स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया।
ऑल वी इमेजिन एज़ लाइट (2024)
पायल कपाडिया द्वारा निर्देशित इस ड्रामा ने तीन दशकों में पाल्मे डी'ओर पुरस्कार के लिए कॉम्टीशन करने वाली पहली भारतीय फिल्म बनकर इतिहास रच दिया। कनी कुसृति, दिव्या प्रभा और छाया कदम अभिनीत यह फिल्म मुंबई में रहने वाली दो नर्सों के जीवन, दोस्ती और भावनात्मक सफर को दर्शाती है। आठ मिनट तक दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बाद, फिल्म ने कान्स के सर्वोच्च सम्मानों में से एक, ग्रैंड प्रिक्स पुरस्कार जीता।
अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित, कैनेडी का प्रीमियर कान फिल्म फेस्टिवल 2023 के मिडनाइट स्क्रीनिंग सेक्शन में हुआ। इस नियो-नोयर थ्रिलर में राहुल भट्ट ने मुख्य किरदार निभाया है, जबकि सनी लियोन ने एक अहम भूमिका निभाई है। डार्क, स्टाइलिश और इमोशनल रूप से परतदार इस फिल्म को सात मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला।
नीरज घेवान की पहली फिल्म मसान ने समकालीन भारतीय स्वतंत्र सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। ऋचा चड्ढा, विक्की कौशल, संजय मिश्रा और श्वेता त्रिपाठी अभिनीत यह फिल्म वाराणसी में स्थापित दो मार्मिक कहानियों को जोड़ती है। इस ड्रामा को कान्स फिल्म फेस्टिवल में पांच मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला और इसने अन सर्टेन रिगार्ड सेक्शन में दो प्रमुख पुरस्कार जीते।