पहले होली का नाम सुनते ही चेहरा खिल जाता था, लेकिन अब ये त्योहार सेलीना जेटली के लिए सिर्फ दर्द की याद दिलाता है। बॉलीवुड की पूर्व मिस इंडिया और फिल्मों जैसे 'जानशीं' में चमक चुकीं एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि व्यक्तिगत त्रासदियों ने उनके लिए इस रंगीन पर्व को हमेशा के लिए बदल दिया। परिवार की हानि और वैवाहिक कलह ने होली की रौनक छीन ली।
बचपन में होली सेलीना के लिए खुशियों का त्योहार था। गलियों में ढोल की थाप, ठंडाई की मस्ती, रंगों की भंवरा और अपनों के साथ हंसी-ठिठोली। लेकिन मां के कैंसर से जूझते हुए खोने की पीड़ा ने सबकुछ उजाड़ दिया। अस्पताल के सफर, अधर में लटकीं बातें और होली के दिन आंसुओं की बाढ़ अब रंग उनकी आंखों में बस दुख के बादल लाते हैं। "जो रंग कभी मेरी त्वचा पर नाचते थे, आज वे मेरे आंसुओं की तरह बहते हैं," उन्होंने भावुक होकर लिखा। ये शब्द न सिर्फ उनकी व्यथा बयां करते हैं, बल्कि कई परिवारों की अनकही कहानी को आवाज देते हैं।
सेलीना का ये खुलासा समाज में महिलाओं के संघर्ष को उजागर करता है। फिल्मों से ब्रेक लेकर बच्चों को प्राथमिकता दी, लेकिन अकेलापन और कानूनी जंग ने एक्ट्रेस को तोड़ डाला। फिर भी, वो हार नहीं मान रही अपनी पीड़ा को ताकत बनाकर दूसरों को प्रेरित कर रही हैं। जहां बॉलीवुड के अन्य सितारे होली पार्टियों, प्रमोशन्स और परिवार संग जश्न मना रहे थे, वहीं सेलिना का त्योहार तनहाई और यादों में बीता। यह अंतर दिखाता है कि चमक-दमक के पीछे सितारों की निजी जिंदगी कितनी जटिल हो सकती है।