Cinema Ka Flashback: जब लता मंगेशकर ने मोहम्मद रफी के कल्ट क्लासिक को दी अपनी आवाज, आज भी रूह को सुकून देता है यह गाना

Cinema Ka Flashback: सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर और शहंशाह-ए-तरन्नुम मोहम्मद रफी की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को अनगिनत सदाबहार नगमे दिए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा गाना भी था जिसे रफी साहब ने गाकर सुपरहिट बनाया, लेकिन बाद में लता दीदी ने उसे अपनी रूहानी आवाज देकर हमेशा के लिए 'अमर' कर दिया।

अपडेटेड Mar 26, 2026 पर 3:06 PM
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भारतीय संगीत के इतिहास में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी दो ऐसे स्तंभ हैं, जिनके बिना बॉलीवुड अधूरा है। इन दोनों ने साथ में सैकड़ों डुएट गाए, लेकिन संगीत की दुनिया में एक दिलचस्प वाकया उस गाने से जुड़ा है जिसे इन दोनों दिग्गजों ने अलग-अलग वर्जन में गाया। हम बात कर रहे हैं साल 1961 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जंगली' के सदाबहार गीत 'एहसान तेरा होगा मुझ पर' की।

शम्मी कपूर की फिल्म और रफी साहब का जादू

फिल्म 'जंगली' में अभिनेता शम्मी कपूर और सायरा बानो की जोड़ी ने तहलका मचा दिया था। इस फिल्म का संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। फिल्म में 'एहसान तेरा होगा मुझ पर' गाने को पहली बार मोहम्मद रफी ने अपनी मखमली आवाज में पिरोया था। रफी साहब का वह 'सैड वर्जन' इतना लोकप्रिय हुआ कि 65 साल बीत जाने के बाद भी आज के श्रोता इसे सुनकर भावुक हो जाते हैं।

लता दीदी का रूहानी स्पर्श


अक्सर फिल्मों में एक ही गाने के मेल और फीमेल वर्जन होते हैं, लेकिन इस गाने के साथ कुछ खास जुड़ा था। लता मंगेशकर ने जब इस गाने को अपनी आवाज दी, तो उन्होंने इसमें एक अलग ही गहराई और ठहराव भर दिया। जहां रफी साहब की आवाज में एक तड़प थी, वहीं लता जी के सुरों में एक रूहानी शांति महसूस होती है। सोशल मीडिया पर आज भी इस गाने के दोनों वर्जन के वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। संगीत प्रेमियों का मानना है कि जिस तरह रफी साहब ने इस गीत में जान फूंकी थी, ठीक उसी तरह सुर कोकिला ने भी इसे गाकर 'कालजयी' बना दिया।

30 हजार गानों का सफर और यह खास नगमा

लता मंगेशकर ने अपने लंबे और सुनहरे करियर में 20 से अधिक भाषाओं में लगभग 30 हजार से ज्यादा गाने गाए। 'एहसान तेरा होगा मुझ पर' को उनकी सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों में गिना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इस गाने के बोल जयदीप ने लिखे थे, जो आज भी प्रेम और समर्पण का सबसे बेहतरीन उदाहरण माने जाते हैं।

आज भी क्यों पसंद किया जाता है यह गाना?

आज के दौर में जब रीमिक्स और शोर-शराबे वाले गानों की बाढ़ है, तब रफी साहब और लता जी का यह गाना सुकून की तलाश करने वालों की पहली पसंद बना हुआ है। 'जंगली' फिल्म का यह गाना केवल एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक अनमोल विरासत बन चुका है जिसे दोनों गायकों ने अपने-अपने अंदाज में अमर कर दिया।

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