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Cinema Ka Flashback: जीनत अमान नहीं, लता मंगेशकर बनने वाली थीं 'सत्यम शिवम सुंदरम' की रूपा, राज कपूर के एक कमेंट ने बदल दी फिल्म की किस्मत

Cinema Ka Flashback: साल 1978 में जब राज कपूर अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम बना रहे थे, तब उन्होंने ‘रूपा’ के किरदार के लिए लता मंगेशकर को चुनने का मन बनाया। राज कपूर का मानना था कि यह किरदार किसी ऐसी शख्सियत को निभाना चाहिए जो संगीत और भावनाओं से गहराई से जुड़ी हो। लता जी उस समय गायन की दुनिया की सरस्वती थीं और उनकी लोकप्रियता चरम पर थी।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Mar 20, 2026 पर 3:24 PM
Cinema Ka Flashback: जीनत अमान नहीं, लता मंगेशकर बनने वाली थीं 'सत्यम शिवम सुंदरम' की रूपा, राज कपूर के एक कमेंट ने बदल दी फिल्म की किस्मत

बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर की फिल्मों का जादू आज भी बरकरार है। उनकी मास्टरपीस 'सत्यम शिवम सुंदरम' (1978) ने सच्चे सौंदर्य की परिभाषा बदल दी। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म की हीरोइन रूपा के किरदार के लिए राज कपूर ने लता मंगेशकर को सोचा था। लेकिन उनकी आवाज की मिठास के बावजूद, राज साहब ने लता जी के चेहरे को 'कुरूप' बताते हुए यह फैसला पलट दिया। यह थ्रोबैक किस्सा आज भी सिनेमा प्रेमियों को चौंकाता है।

फिल्म की अनोखी अवधारणा

राज कपूर हमेशा प्रयोगशील निर्देशक रहे। 'सत्यम शिवम सुंदरम' में उन्होंने दिखाया कि असली सौंदर्य चेहरे में नहीं, आत्मा में बसता है। कहानी रूपा नामक ग्रामीण लड़की की है, जिसका चेहरा जन्म से जलने के कारण विकृत है, लेकिन उसकी आवाज स्वर्गलोक सी मधुर है। इंजीनियर रोपला (शशि कपूर) पहले उसकी आवाज से मोहित होता है, फिर उसके चेहरे को देखकर टूट जाता है। अंत में सच्चाई जानकर दोनों का मिलन होता है। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है।

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत और पंडित नरेंद्र शर्मा के बोलों ने फिल्म को अमर बना दिया। 'यशोमति मैया से बोले नंदलाला' और टाइटल सॉन्ग जैसे गीत लता मंगेशकर की जादुई आवाज में आज भी गूंजते हैं। लेकिन रूपा का किरदार निभाने के लिए राज कपूर ने कई एक्ट्रेस को परखा।

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