बॉलीवुड की चमक-दमक वाली दुनिया में कई सितारे ऐसे चमके जो कभी आसमान छूते थे, लेकिन एक झटके में धूल चाटने लगे। आज हम बात कर रहे हैं नवीन निश्चल की, जिन्होंने रेखा के साथ 1970 में आई फिल्म 'सावन भादों' से डेब्यू किया। उस दौर में नवीन का जलवा अमिताभ बच्चन से भी बड़ा था, पर उनकी अहंकारी हरकतों ने सब कुछ उजाड़ दिया।
धमाकेदार शुरुआत और रेखा संग रोमांस
नवीन निश्चल का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। बेंगलुरु के मिलिट्री स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक्टिंग का रास्ता चुना। 'सावन भादों' में वे अमीर नौजवान विक्रम बने, जिनकी प्रेम कहानी गांव की चंदा (रेखा) से शुरू हुई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया और दोनों सितारों को रातोंरात स्टार बना दिया। इस जोड़ी ने बाद में 'दोस्त' जैसी फिल्मों में भी साथ काम किया। रेखा के करियर की नींव रखने वाले नवीन उस समय के सबसे हॉट हीरो थे। प्रोड्यूसर्स की लाइन लगी रहती, क्योंकि उनकी हैंडसम पर्सनालिटी और स्मूथ डायलॉग डिलीवरी ने लड़कियों का दिल जीत लिया था।
70 के दशक में जब अमिताभ 'जंजीर' जैसी फिल्मों से उभर रहे थे, नवीन पहले से ही टॉप पर थे। 'प्रीत की डोर', 'नशा' जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार का तमगा दिलाया। साइनिंग अमाउंट इतना था कि बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स जेब ढीली करने को तैयार रहते। लेकिन यहीं से उनकी कहानी ने करवट ली। सफलता ने उनके सिर चढ़कर बोलना शुरू कर दिया। सेट पर देरी से पहुंचना, डायरेक्टर्स को टोकना और कॉन्ट्रैक्ट तोड़ना जैसी शिकायतें बढ़ने लगीं।
अहंकार ने नवीन को अंधा बना दिया। वे खुद को 'सुपरस्टार' समझने लगे और छोटे रोल ठुकराने लगे। अमिताभ जैसे मेहनती कलाकार आगे बढ़ते गए, वहीं नवीन के पास अच्छी स्क्रिप्ट्स आने बंद हो गईं। 80 के दशक तक वे साइड रोल्स तक सीमित हो गए। बाद में उन्होंने टीवी में 'शक्ति' जैसे सीरियल्स से वापसी की कोशिश की, लेकिन ग्लैमर वाली दुनिया अब पीछे छूट चुकी थी। 2011 में 66 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
नवीन निश्चल की कहानी बॉलीवुड का एक सबक है कि स्टारडम को बनाए रखने के लिए सिर्फ टैलेंट ही नहीं, बल्कि विनम्रता और प्रोफेशनलिज़्म भी जरूरी है। कभी अमिताभ बच्चन से भी बड़े स्टार माने जाने वाले नवीन का करियर अहंकार और विवादों की वजह से बर्बाद हो गया। आज उनकी यादें रेखा की पहली फिल्म और शुरुआती हिट्स के साथ जुड़ी हैं, लेकिन उनका पतन इंडस्ट्री के लिए चेतावनी भी है कि सफलता को संभालना उतना ही मुश्किल है जितना उसे पाना।