फिल्म- कॉकटेल 2

फिल्म- कॉकटेल 2
रेटिंग-3.5/5
कलाकार-शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना, कृति सेनन
निर्देशक-होमी अदजानिया
Cocktail 2 Review: हर प्रेम कहानी को अपना मैसेज देने के लिए बड़े ड्रामे की जरूरत नहीं होती। 'कॉकटेल 2' कुछ ऐसा ही करती है क्योंकि यह चीजों को सरल रखती है। रिश्तों को सिंपल और साफ देखती है और अपने किरदारों को खुलकर जीने का मौका देती है।
जहां पहली कॉकटेल अपनी स्टाइल, ग्लैमर और हाई-एनर्जी अंदाज के लिए याद की जाती है, वहीं यह फिल्म एक शांत और परिपक्व रास्ता चुनती है। कहानी और टोन के लिहाज से इसका पहली फिल्म से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसके बजाय, यह अपनी एक अलग दुनिया बनाती है—ज्यादा निजी, ज्यादा वास्तविक और आज के रिश्तों की सच्चाई के कहीं अधिक करीब।
फिल्म की कहानी कुनाल (शाहिद कपूर), एली (कृति सेनन) और दिया (रश्मिका मंदाना) के इर्द-गिर्द घूमती है। तीन ऐसे लोग जो इमोशनली तो अपनी चीजों को लेकर क्लीयर हैं, लेकिन फैसलों के मामले में उलझे हुए हैं। यहां प्यार है, लेकिन झिझक भी है। अपनापन है, लेकिन शक भी है। इन्हीं इमोशनल खींचतान के बीच फिल्म अपनी असली पहचान बनाती है।
फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें सब कुछ बेहद जाना पहचाना और रियल लगता है। ये किरदार किसी बड़े पर्दे के नायक नहीं, बल्कि आम लोग हैं, जो हमेशा सही बातें नहीं कह पाते, अपनी भावनाओं को समझने में संघर्ष करते हैं और कई बार सच का एहसास तब होता है जब बहुत देर हो चुकी होती है।
तरुण जैन द्वारा लिखित पटकथा और लव रंजन की कहानी इसी ईमानदारी पर आधारित है। डॉयलॉग बेहद स्वाभाविक हैं। कई बातचीत अधूरी-सी लगती है, लेकिन यही अधूरापन उन्हें और अधिक वास्तविक बना देता है। शाहिद कपूर अपने शानदार अभिनय से पूरी फिल्म को मजबूती दी हैं। वह भावनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के बजाय अपने मौन और हाव-भाव के जरिए बहुत कुछ कह जाते हैं। उनका भावनात्मक टूटन वाला सीन और फिल्म के एंड का मोनोलॉग लंबे समय तक याद रहता है।
रश्मिका मंदाना ने दिया के किरदार में एक सॉफ्टनेस है, जो फिल्म के इमोशनल माहौल के साथ पूरी तरह मेल खाती है। उनके अभिनय में एक सहज कमजोरी और सच्चाई दिखाई देती है, जो कभी बनावटी नहीं लगती। एली के किरदार में कृति सेनन तीनों कलाकारों में सबसे बैलेंस नजर आती हैं। वह अपने किरदार को बेहद पेसेंश और कॉनफिडेंस के साथ निभाती हैं। बिना किसी एक्ट्रा ड्रामा के वह कहानी में एक परिपक्वता जोड़ती हैं, जो बाकी भावनात्मक उथल-पुथल को संतुलित करती है।
निर्देशक होमी अदजानिया ने कहानी को बिना किसी अनावश्यक ज्यादा ड्रामे के पेश किया है। वह सीन्स को जबरदस्ती हाइलाइट बनाने की कोशिश नहीं करते, बल्कि उन्हें स्वाभाविक रूप से सामने आने देते हैं। यही संयम फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। फिल्म बेहद शानदार है। सिसिली की खूबसूरत लोकेशन्स कहानी का हिस्सा बनती हैं। सिनेमैटोग्राफर संथाना कृष्णन रविचंद्रन ने इन सीन्स को बेहद खूबसूरती से कैमरे में कैद किया है।
अनाइता श्रॉफ अदजानिया की कॉस्ट्यूम स्टाइलिंग आधुनिक, सहज और वास्तविक है, जो किरदारों के व्यक्तित्व के साथ पूरी तरह मेल खाती है। प्रीतम का म्यूजिक कहानी में घुल-मिल जाता है, अलग से ध्यान आकर्षित करने की कोशिश नहीं करता। गाने कहानी की रफ्तार को रोकते नहीं, बल्कि उसके साथ बहते हैं। अमिताभ भट्टाचार्य के गाने सरल और दिल से जुड़े हुए लगते हैं। वहीं अक्षरा प्रभाकर की एडिटिंग फिल्म की लय को बनाए रखती है।
कॉकटेल 2 समझ की कहानी है—खुद को समझने की, अपने साथी को समझने की और उन भावनात्मक दूरियों को समझने की जो अक्सर दो लोगों के बीच मौजूद होती हैं। फिल्म यह भी दिखाती है कि आज के रिश्ते असुरक्षा, स्वतंत्रता और सोशल मीडिया के लगातार बढ़ते प्रभाव से किस तरह प्रभावित होते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर कहानी और अधिक गहराई या कसाव की मांग करती है, लेकिन इसके बावजूद फिल्म अपनी भावनात्मक पकड़ कभी नहीं खोती।
दिनेश विजान द्वारा निर्मित और मैडॉक फिल्म्स व लव फिल्म्स के बैनर तले बनी कॉकटेल 2 प्यार को परिभाषित करने की कोशिश नहीं करती। यह सिर्फ यह दिखाती है कि प्यार कितना जटिल, अपूर्ण और वास्तविक हो सकता है। और यही सादगी फिल्म को खास बनाती है। कॉकटेल 2 बिना शोर मचाए दिल पर अपनी छाप छोड़ जाती है।
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