लोकप्रिय गायक जुबिन नौटियाल की पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जस्टिस तुषार राव गेदेला ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान गायक के वकील से सवालों की बौछार कर दी। उन्होंने कड़ा सवाल किया कि उत्तराखंड में रहने वाले जुबिन दिल्ली कोर्ट क्यों आए, जबकि स्थानीय अदालतें इस मामले को संभाल सकती हैं।
जस्टिस गेदेला ने तंज कसते हुए कहा, "आप यहां क्यों हैं? जो चीजें दिल्ली में उपलब्ध हैं, वही उत्तराखंड में भी तो हैं। वहां की कोर्टें खत्म तो नहीं हो गईं!" जुबिन के वकील ने दलील दी कि मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी (MeITY) और DoPT जैसे नियंत्रक यहां हैं, इसलिए दिल्ली सही जगह है। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए पूछा, "क्या सिर्फ मंत्रालय होने से हर केस दिल्ली आ जाएगा? मद्रास, कलकत्ता या बॉम्बे हाईकोर्ट केस क्यों न लें?" कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी कंपनियां रोमानिया और UAE में हैं, तो उत्तराखंड कोर्ट उन्हें समन जारी क्यों नहीं कर सकती? "गूगल उत्तराखंड में उपलब्ध नहीं क्या?" उन्होंने व्यंग्य किया।
जुबिन ने जम्मेबल लिमिटेड और अन्य के खिलाफ याचिका दायर की थी। दावा है कि बिना अनुमति उनके नाम, आवाज, तस्वीर और छवि का डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दुरुपयोग हो रहा है। इससे उनके पर्सनालिटी राइट्स, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट का उल्लंघन हो रहा। 'रातां लंबियां', 'लुट गए', 'तुम ही आना' जैसे सुपरहिट गीतों से मशहूर जुबिन डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान बचाने की जंग लड़ रहे हैं। कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करने का भरोसा दिया, लेकिन चेतावनी दी कि ये स्थायी नहीं होंगे। "हमें सही क्षेत्राधिकार बताओ," उन्होंने जोर दिया।
ये मामला सेलेब्स के बीच बढ़ते ट्रेंड को उजागर करता है। हाल ही में कई स्टार्स ने पर्सनालिटी राइट्स के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। जस्टिस ने सवाल उठाया कि स्थानीय कोर्ट्स को नजरअंदाज क्यों? जुबिन उत्तराखंड के देहरादून से हैं, जहां उनकी जड़ें हैं। कोर्ट ने मामले में उचित आदेश जारी करने का कहा। सोशल मीडिया पर फैंस जुबिन के समर्थन में हैं, लेकिन कोर्ट की फटकार चर्चा का केंद्र बनी। क्या ये केस IP लॉ में नया मिसाल बनेगा? जुबिन जैसे कलाकारों के लिए डिजिटल युग में पहचान की लड़ाई अब कानूनी जंग बन चुकी है। उत्तराखंड कोर्ट का फैसला तय करेगा कि आगे क्या होगा।
जुबिन नौटियाल, जो ‘तुम ही आना’ और ‘मनिके’ जैसे हिट गानों के लिए जाने जाते हैं, ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी लोकप्रियता का गलत फायदा उठाया जा रहा है। लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान है और किसी भी सेलिब्रिटी को विशेष छूट नहीं दी जा सकती।