Janhvi Kapoor: 'पेड्डी' में जाह्नवी कपूर के 'सिड्यूसिंग कैरेक्टर' को देख लोगों का ठनका माथा, साउथ डायरेक्टर्स को लिया आड़े हाथ
Janhvi Kapoor: जाह्नवी कपूर की हालिया रिलीज फिल्म 'पेड्डी' वैसे तो दर्शकों का दिल जीता है, लेकिन एक्ट्रेस किरदार को लेकर बेहद निराश किया है। फिल्म में जाह्नवी का अति बोल्ड अवतार लोगों की समझ से परे हैं। पिछली साउथ फिल्मों में भी नजर डाले तो जाह्नवी कपूर का किरदार शोकेस से ज्यादा नहीं है, जबकि हिंदी फिल्मों में उनके कई दमदार कैरेक्टर देखने को मिले हैं।
एक्ट्रेस के कैरेक्टर का क्रिटिसिज्म फिल्म की रिलीज के साथ बड़ा मुद्दा बन गया है, जिससे इंडियन कमर्सियल सिनेमा में महिलाओं के रिप्रजंटेशन को लेकर एक व्यापक बहस फिर से शुरू हो गई है।
Janhvi Kapoor: 'धड़क' फिल्म से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाली जाह्नवी कपूर ने कई हिट तो कई फ्लॉप फिल्में दी हैं। इनमें हिंदी से लेकर साउथ फिल्में तक शामिल हैं। वहीं बीते कुछ सालों में उनका साउथ फिल्मों की तरफ झुकाव भी ज्यादा देखने को मिला है। जूनियर एनटीआर से लेकर राम चरण तक वह बड़े कलाकारों से लेकर बड़ी फिल्मों तक में नजर भी आ रही हैं। वहीं उन्हें साउथ इंडस्ट्री के कसीदे पढ़ते भी खूब देखा जा रहा है। लेकिन हालिया रिलीज फिल्म 'पेड्डी' की रिलीज के बाद उनका अपने कैरेक्टर को लेकर चुनाव और साउथ डायरेक्टर्स की सोच पर कई सवाल खड़े करता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों और फिल्म समीक्षकों ने फिल्म में जाह्नवी कपूर के सिड्यूसिंग कैरेक्टर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि कैमरा फ्रेमिंग, किरदारों के बीच का रिश्ता और बोल्ड सीन्स के जरिए उन्हें एक कैरेक्टर के बाजाय ऑब्जेक्ट के रूप में पेश किया गया है।
यह क्रिटिसिज्म फिल्म की रिलीज के साथ बड़ा मुद्दा बन गया है, जिससे इंडियन कमर्सियल सिनेमा में महिलाओं के रिप्रजंटेशन को लेकर एक व्यापक बहस फिर से शुरू हो गई है। सबसे जरूरी बात यह है कि यह सवाल उठ रहा है कि एक्ट्रेस ने ऐसा होने की अनुमति क्यों दी।
The romantic dynamic between Janhvi Kapoor and Ram Charan in #Peddi is one of the most disgusting and dated portrayals I have seen.
Shameless shots of her naval and chest. No care for consent. Moral stance of a saviour while constantly ogling and letching at her! — ANMOL JAMWAL (@jammypants4) June 4, 2026
दरअसल 'पेड्डी'फिल्म रिव्यूवर और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर अनमोल जमवाल, जिन्हें जैमी पैंट्स के नाम से जाना जाता है, ने सोशल मीडिया पर रिएक्ट किया है। जमवाल ने लीड कपल के बीच के रोमांटिक रिश्ते और कपूर को पर्दे पर जिस तरह से पेश किया गया है, दोनों की निंदा की है।
उन्होंने लिखा कि फिल्म #पेड्डी में जाह्नवी कपूर और राम चरण के बीच का रोमांटिक रिश्ता अब तक के सबसे घिनौने और पुराने ज़माने के फिल्माए सीन्स में से एक है। उनकी नाभि और छाती को इतनी बेशर्मी के साथ क्लोज फ्रेम दिखाया गया है। क्या एख्ट्रेस की परमिशन की कोई परवाह नहीं थी। वहीं खुद को रक्षक बताते हुए सभी लगातार उन्हें घूरते और गंदी नज़र से देखते हैं!”
इसी तरह की आलोचना केबीपी रिव्यूज नामक मैग्जीन से भी सामने आई, जिसने कपूर के कैरेक्टर को फिल्म के सबसे परेशान करने वाले पहलुओं में से एक बताया। उन्होंने लिखा बेहद घिनौनी, बेशर्मी वाली बात। फिल्म निर्माताओं ने नाभि और छाती के क्लोज-अप सीन्स को कैसे मंज़ूरी दे दी, यह वाहियात है। जाह्नवी कपूर ने इन सीन्स की अनुमति कैसे दी? बेहद घटिया!!! इस बार सेंसर बोर्ड कहां था?? बेशर्मी,।
#Peddi Interval Review : It’s a CRAP !!!!! The Movie is too over the top, Over the top acting, music and what not but the most awful thing is Portrayal of Jhanvi Kapoor. The Most Disgusting, Shameless thing. How did makers approved the close up scenes of Naval and Chest, it’s… — KBP Reviews (@KshitizCritic) June 4, 2026
विरोध केवल सीन तक ही सीमित नहीं रहा है। कई दर्शकों ने कुछ खास सीन्स की ओर इशारा किया, जिन्हें वे अपमान और शोषण की सीमा पार करने वाला बता रहे हैं। उनका तर्क था कि ऐसे पलों को कहानी के संदर्भ में गलत बताने के बजाए मनोरंजन के लिए पेश किया जाता है।
दर्शकों के लिए यह मुद्दा केवल कुछ सीन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर बनी बड़ी फिल्मों में महिला किरदारों के कैरेक्टर को लेकर एक बार फिर उठ रही चिंता को दिखाता है। एक यूजर ने लिखा, "मुझे जरा भी झटका नहीं लगा है कि जाह्नवी कपूर इसमें भी सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गई हैं। लेकिन मुझे इस बात का शॉक जरूर लगा है कि फिल्म निर्माता उन्हें ये स्क्रिप्ट और भूमिकाएं कैसे सुनाते होंगे और जाह्नवी को इन सभी फिल्मों में क्या रोमांचक लगता होगा, जो वह हां कर देती हैं।"
Saw some reviews of Peddi. Not surprised that they are BAD. Not surprised that Janhvi Kapoor is a mere eyecandy in this also. But I wonder how the makers might narrate these scripts and roles to her all the time and what exciting Janhvi might be seeing in all these films.#Peddi
एक अन्य दर्शक ने पोस्ट कर लिखा फिल्म कर्मिशियल तेलुगु सिनेमा के परिचित रुझानों को दर्शाती है। "तेलुगु इंडस्ट्री की एक विशिष्ट टॉलीवुड फिल्म, जिसने जाह्नवी कपूर को ऑबजेक्ट के साथ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का मुख्य स्त्रोत बनाकर यूज किया गया है।"
फिल्म “पेड्डी” को लेकर चल रही बहस ऐसे समय में सामने आई है जब महिला रिप्रजंटेशन को लेकर दर्शकों की अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं। पिछले एक दशक में भारतीय सिनेमा में सशक्त रूप से महिला किरदारों की मांग बढ़ी है। वहीं दूसरी ओर, कई मेन स्ट्रीम की कमर्सियल फिल्में अभी भी कहानी कहने की उन परंपराओं पर निर्भर हैं, जिनके बारे में आलोचकों का कहना है कि वे फिल्म निर्माण के पुराने दौर से अभी भी जुड़ी हैं।
Peddi movie reviews are flowing in one and only direction and it is the expected one tbh. Typical Tollywood film from Telugu industry which has used Janhvi Kapoor as the main source of box office collection with the over objectification of her lol — ` (@bdrijalab) June 4, 2026
“पेड्डी” पर मिल रहे रिएक्शन से पता चलता है कि दर्शक हर एक चीज पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। आज के समय में दर्शक कंटेंट, कैरेक्टर से लेकर हर चीज के बारे में खुलकर सवाल उठाते हैं। इस कॉन्ट्रोवर्सी का फिल्म पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। लेकिन अगर शुरुआती ऑनलाइन चर्चा को देखें, तो “पेड्डी” को न केवल एक स्पोर्ट ड्रामा के रूप में, बल्कि जेंडर रिप्रजंटेशन , सहमति और इंडियन मेन स्ट्रीम के सिनेमा में महिलाओं के रिप्रजंटेशन को लेकर चल रही बहस के रूप में भी एनालाइज किया जा रहा है।
"पेड्डी" को लेकर चल रही चर्चा कपूर की तेलुगु फिल्म "देवरा पार्ट 1" के बाद हुई आलोचनाओं बात को भी दोहराती है। हालांकि फिल्म रिलीज से पहले जूनियर एनटीआर के साथ कपूर की जोड़ी ने काफी सुर्खियां बटोरीं थीं, लेकिन दर्शकों और आलोचकों के एक वर्ग का तर्क था कि उनका किरदार ज्यादातर रोमांटिक और ग्लैमरस सीन्स तक ही सीमित था। फिल्म की मेन स्टोरी पर का उनके किरदार से ज्यादा जुड़ाव नहीं था। उस समय, चर्चा मुख्य रूप से फिल्म में उनके अभिनय के समय और किरदार के विकास पर केंद्रित थी। हालांकि, "पेड्डी" के साथ, यह आलोचना महिलाओं के कैरेक्टर को लेकर एक बड़ी बहस में तब्दील होती दिख रही है, जिसमें दर्शक न केवल कपूर के अभिनय पर सवाल उठा रहे हैं, बल्कि फिल्म में उनके कैरेक्टर और परफॉमेंस के तरीके पर भी सवाल उठा रहे हैं।