Dhurandhar Film Row: सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की तरफ से रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' को रिलीज के लिए हरी झंडी मिल गई है। 'धुरंधर' 5 दिसंबर को रिलीज होने वाली है। अशोक चक्र विजेता शहीद मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने फिल्म की रिलीज को लेकर चिंता जताई थी। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हुए मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाए जाने की मांग की थी। उनका आरोप था कि फिल्म मेजर मोहित शर्मा पर बनी है। लेकिन मेकर्स ने इसे बनाने से पहले परिवार या सेना की इजाजत नहीं ली।
CNN-News18 के मुताबिक CBFC ने साफ तौर पर कहा है कि 'धुरंधर' का मेजर मोहित शर्मा की जिंदगी से सीधे या इनडायरेक्टली कोई लेना-देना नहीं है। सेंसर बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि फिल्म असल में एक 'काल्पनिक कहानी' है। फिल्म बॉडी ने यह भी कहा कि धुरंधर को रिलीज से पहले इंडियन आर्मी के अधिकारियों को भेजने की कोई जरूरत नहीं है। वह गाइडलाइंस के मुताबिक सर्टिफिकेशन प्रोसेस जारी रखेगी।
एक दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने CBFC से कहा था कि अगर जरूरत पड़े तो वह मामला इंडियन आर्मी को भेज दे। हाई कोर्ट ने सोमवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से कहा कि वह फिल्म 'धुरंधर' को सर्टिफिकेट देते समय मेजर मोहित शर्मा के माता-पिता की आपत्तियों पर विचार करे।
जस्टिस सचिन दत्ता ने सीबीएफसी को निर्देश दिया कि वह फिल्म सर्टिफिकेशन पर निर्णय लेने से पहले शर्मा के अभिभावकों द्वारा की गई शिकायतों पर विचार कर उनकी जांच करे। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। मेजर शर्मा 2009 में कश्मीर घाटी में आतंकवादी ग्रुप्स को टारगेट करते हुए ऑपरेशन करते समय ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे।
परिवार ने दावा किया कि धुरंधर के ट्रेलर और प्रमोशनल मटीरियल में दिखाई गई कई चीजें मेजर शर्मा के मिलिट्री करियर की खास घटनाओं की नकल लगती हैं। इसमें कश्मीर में किए गए क्लासिफाइड काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन भी शामिल हैं। याचिका में जोर देकर कहा गया कि शहीद कोई कमर्शियल चीज नहीं है। उनकी जिंदगी को मुनाफे के लिए सच्चाई, इज्जत या सही इजाजत के बिना दोबारा नहीं बनाया जा सकता।
परिवार ने दलील दी है कि फिल्म में बिना इजाजत के मेजर शर्मा को संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मरने के बाद मिले उनके पर्सनैलिटी अधिकारों का उल्लंघन किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धुरंधर में सेंसिटिव मिलिट्री स्ट्रेटेजी, घुसपैठ के तरीके और ऑपरेशनल डिटेल्स को बिना किसी संकेत के दिखाया गया है कि फिल्म बनाने वालों ने इंडियन आर्मी के एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इन्फॉर्मेशन (ADGPI) से मंजूरी या स्क्रिप्ट की मंजूरी ली है।
इस पर जस्टिस सचिन दत्ता ने सीबीएफसी को निर्देश दिया है कि वह फिल्म सर्टिफिकेशन पर निर्णय लेने से पहले शर्मा के अभिभावकों द्वारा की गई शिकायतों पर विचार कर उनकी जांच करे। अदालत ने कहा, "याचिका का निस्तारण इस निर्देश के साथ किया जाता है कि सीबीएफसी सर्टिफिकेशन देने से पहले याचिकाकर्ता की चिंताओं सहित मामले के सभी पहलुओं पर विचार करेगा।"
उसने कहा, "यदि सीबीएफसी को लगता है कि इस मामले को आवश्यक विचार के लिए भारतीय सेना को भेजना उचित है, तो उन्हें ऐसा भी करना चाहिए। सीबीएफसी को यह कार्य जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए।" सुनवाई के दौरान सीबीएफसी के वकील ने अदालत को बताया कि यह फिल्म किसी के जीवन पर आधारित नहीं है।