Dibyendu Bhattacharya: 'हमें काला एक्टर नहीं चाहिए', दिब्येंदु भट्टाचार्य ने खोली बॉलीवुड की पोल, डार्क स्किन की वजह से एड से किया गया बाहर!

Dibyendu Bhattacharya: एक्टर दिब्येंदु भट्टाचार्य ने बॉलीवुड में रेसिजम का खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें एक एड से महज इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि ब्रांड को 'काला एक्टर' नहीं चाहिए था। उन्होंने इस मानसिकता पर दुख जताते हुए क्या कहा आइए जानते हैं।

अपडेटेड May 07, 2026 पर 6:42 PM
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चकाचौंध से भरी फिल्म इंडस्ट्री के पीछे का स्याह चेहरा एक बार फिर सामने आया है। अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज अभिनेता दिब्येंदु भट्टाचार्य ने हाल ही में फिल्म और विज्ञापन जगत में फैले रेसिजम पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। दिब्येंदु ने बताया कि आज के दौर में भी कलाकारों को उनकी प्रतिभा के बजाय उनके शरीर के रंग से तौला जा रहा है।

एन वक्त पर विज्ञापन से किया गया रिप्लेस

एक हालिया इंटरव्यू में अपने कड़वे अनुभव को साझा करते हुए दिब्येंदु ने बताया कि उन्हें एक बड़े ब्रांड के विज्ञापन के लिए चुना गया था। करीब 4-5 दिनों तक बातचीत चली और सब कुछ तय हो गया था। लेकिन जब शूटिंग से महज तीन दिन पहले उन्होंने प्रोजेक्ट की अपडेट जाननी चाही, तो उन्हें जो जवाब मिला उसने उन्हें झकझोर कर रख दिया।

प्रोडक्शन टीम ने उनसे कहा, "दादा, आपको रिप्लेस कर दिया गया है क्योंकि आप काले हो और हमें विज्ञापन के लिए काला एक्टर नहीं चाहिए।" यह सुनकर दिब्येंदु हैरान रह गए कि कैसे एक मंझे हुए कलाकार को सिर्फ उसकी त्वचा के रंग की वजह से रिजेक्ट कर दिया गया।


प्रतिभा पर भारी पड़ता 'रंग'

दिब्येंदु भट्टाचार्य कोई नया नाम नहीं हैं। उन्होंने 'देव डी', 'ब्लैक फ्राइडे', 'लुटेरा' और हालिया वेब सीरीज 'अनदेखी' और 'मामला लीगल है' में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया है। उन्होंने इस मानसिकता पर दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, इंडस्ट्री में आज भी 'फेयर स्किन' (गोरी त्वचा) को सफलता का मानक माना जाता है, जो कला के साथ सरासर नाइंसाफी है।

इस भेदभाव पर गहरा कटाक्ष करते हुए दिब्येंदु ने समाज और परवरिश पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को बचपन से ही सामाजिक मूल्य और नैतिकता नहीं सिखाई जाएगी, तो ऐसी सोच को बदलना नामुमकिन है। उन्होंने कोरिया और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां अनुशासन और दूसरों के प्रति सम्मान को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि हमारे यहाँ यह अक्सर घर की परवरिश तक ही सीमित रह जाता है।

क्या कभी बदलेगा बॉलीवुड?

दिब्येंदु का यह खुलासा मनोरंजन जगत के उस "ब्यूटी स्टैंडर्ड" पर तमाचा है, जो केवल बाहरी दिखावे को महत्व देता है। एक तरफ जहां सिनेमा में 'यथार्थवाद' की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक दिखने वाले चेहरों को रंग के आधार पर ठुकरा दिया जाता है। दिब्येंदु की यह कहानी केवल एक अभिनेता की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों कलाकारों का दर्द है जो अपनी काबिलियत के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन 'रंगभेद' की दीवार उन्हें रोक देती है।

वर्क फ्रंट की बात करें तो, दिब्येंदु हाल ही में 'अनदेखी' के चौथे सीजन में नजर आए हैं, जहां उनके पुलिस अधिकारी के किरदार को दर्शकों ने खूब सराहा है। उनकी यह बेबाकी शायद इंडस्ट्री के बंद दरवाजों के पीछे छिपी इस कड़वी हकीकत को बदलने की दिशा में एक छोटी लेकिन जरूरी पहल साबित हो।

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