Toaster Movie Review: क्या राजकुमार राव की 'टोस्टर' मनोरंजन का सही स्वाद दे पाई? जानें कैसी है यह 'कॉमेडी ऑफ एरर्स'!

Toaster Movie Review: राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा की फिल्म टोस्टर मिडिल क्लास की कंजूसी और अजीबोगरीब स्थितियों पर आधारित एक मजेदार डार्क कॉमेडी है, जिसे समीक्षकों ने 3.5 स्टार दिए हैं। फिल्म का पहला हिस्सा अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से प्रभावित करता है, लेकिन दूसरे भाग में मर्डर मिस्ट्री और कॉमेडी के बीच का तालमेल थोड़ा कमजोर और खिंचा हुआ महसूस होता है।

अपडेटेड Apr 15, 2026 पर 3:25 PM
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बॉलीवुड के वर्सटाइल अभिनेता राजकुमार राव अपनी अदाकारी से हर बार दर्शकों का दिल जीत लेते हैं। इस बार वह न केवल एक अभिनेता के रूप में, बल्कि अपनी पत्नी पत्रलेखा के साथ बतौर निर्माता भी अपनी नई फिल्म 'टोस्टर' लेकर आए हैं। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई यह फिल्म एक मध्यमवर्गीय परिवार की साधारण सी दिखने वाली जिंदगी और उसमें छिपे अजीबोगरीब मोड़ की कहानी है।

एक 'टोस्टर' और ढेर सारा ड्रामा

फिल्म की कहानी के केंद्र में, जैसा कि नाम से जाहिर है, एक टोस्टर है। कहानी मुंबई के बोरीवली में रहने वाले रमाकांत (राजकुमार राव) की है, जो बेहद कंजूस है। वह अपनी पत्नी शिल्पा (सान्या मल्होत्रा) के साथ एक साधारण जीवन जीता है, जहां वह ₹6 के मोबाइल बिल के लिए लड़ता है और मुफ्त नाश्ते के जुगाड़ में रहता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब रमाकांत एक शादी के लिए ₹4,999 का टोस्टर खरीदता है। जब शादी टूट जाती है, तो वह अपना कीमती तोहफा वापस लेने के लिए निकल पड़ता है और यहीं से शुरू होता है गलतियों और अराजकता का एक ऐसा सिलसिला, जो आखिरी उसे अपराध की दुनिया के दरवाजे पर खड़ा कर देता है।

अभिनय में फिर चमके सितारे


राजकुमार राव ने एक डरे हुए, कंजूस और मिडिल क्लास व्यक्ति के रूप में शानदार काम किया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और चेहरे के हाव-भाव फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। वहीं, सान्या मल्होत्रा ने उनका बखूबी साथ दिया है। सान्या का किरदार शांत है लेकिन अपनी अजीब आदतों से दर्शकों को प्रभावित करता है।

फिल्म में अर्चना पूरन सिंह ने मालिनी खेरवानी के रूप में सरप्राइज पैकेज की तरह काम किया है। उनका किरदार काफी बोल्ड और दिलचस्प है। इसके अलावा अभिषेक बनर्जी, सीमा पाहवा और फराह खान जैसे कलाकारों ने अपने छोटे लेकिन प्रभावशाली कैमियो से फिल्म में जान फूंक दी है।

कहानी की बनावट

निर्देशक विवेक दासचौधरी ने फिल्म के पहले हिस्से को बेहद मजेदार बनाया है। मध्यमवर्गीय जीवन की छोटी-छोटी बारीकियों और उनकी कंजूसी को जिस तरह से दिखाया गया है, वह आपको हंसने पर मजबूर कर देता है। हालांकि, फिल्म का दूसरा हिस्सा थोड़ा भटकता हुआ नजर आता है। फिल्म जो शुरुआत में एक 'कैरेक्टर कॉमेडी' लगती है, वह धीरे-धीरे 'मर्डर मिस्ट्री' बनने की कोशिश करने लगती है। इस बदलाव की वजह से फिल्म की गति थोड़ी धीमी हो जाती है और क्लाइमैक्स तक आते-आते यह थोड़ी खिंची हुई लगने लगती है। डार्क कॉमेडी और सटायर (व्यंग्य) का मेल पूरी तरह से सटीक नहीं बैठ पाया है।

टोस्टर एक ऐसी फिल्म है जो बाहर से तो काफी क्रिस्पी और मजेदार दिखती है, लेकिन अंदर से थोड़ी 'अधपकी' रह गई है। अगर आप राजकुमार राव के अभिनय के प्रशंसक हैं और हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि कैसे छोटी-छोटी चीजें और इंसानी जिद कभी-कभी बड़े संकटों को जन्म दे सकती है।

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