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Kailash Kher: "कलाकार को जोकर न समझें", जब कैलाश खेर ने मंच पर गाने से किया इनकार

Kailash Kher: दिल्ली के एक कार्यक्रम में कैलाश खेर ने मंच पर अचानक गाना गाने की फरमाइश को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि "कलाकार कोई जोकर नहीं है जिसे जब मन चाहे मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किया जाए।" उन्होंने संगीत को एक पवित्र साधना बताते हुए कहा कि जिस तरह सचिन तेंदुलकर से बीच रास्ते में छक्का मारने की मांग नहीं की जाती, उसी तरह कलाकारों की गरिमा और उनके रियाज का सम्मान करना जरूरी है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Apr 26, 2026 पर 6:22 PM
Kailash Kher: "कलाकार को जोकर न समझें", जब कैलाश खेर ने मंच पर गाने से किया इनकार

संगीत की दुनिया में अपनी जादुई आवाज और सूफियाना अंदाज के लिए मशहूर गायक कैलाश खेर इन दिनों अपनी गायकी नहीं, बल्कि अपने बेबाक और सख्त रुख के कारण चर्चा में हैं। अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों में मशहूर गायकों से दो लाइन सुनाने की फरमाइश करना एक आम बात मानी जाती है, लेकिन कैलाश खेर ने इस 'आम' परंपरा पर कड़ा प्रहार किया है। दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान जब उनसे अचानक गाने का अनुरोध किया गया, तो उन्होंने न केवल मना किया, बल्कि आयोजकों और दर्शकों को कला की गरिमा का पाठ भी पढ़ा दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 25 अप्रैल को दिल्ली के ताज पैलेस में आयोजित 'सिक्स सिग्मा लीडरशिप समिट' के दौरान हुई। कार्यक्रम के बीच में जब मंच संचालक (होस्ट) ने कैलाश खेर से कुछ पंक्तियां गुनगुनाने और माहौल बनाने का आग्रह किया, तो गायक ने इसे अपनी गरिमा के विरुद्ध माना। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह इसी मानसिकता को बदलना चाहते हैं। खेर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "यही मैं बदलना चाहता हूँ। गायक और संगीत को इस तरह न देखा जाए कि 'सर, दो लाइन गा दीजिए, मूड बना दीजिए'। यह बहुत गलत है। कलाकार कोई ऑन-डिमांड मशीन या मनोरंजन का साधन मात्र नहीं है।"

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