Bollywood Ramayana: चेहरे बदले, तकनीक बदली पर नहीं बदला 'राम' का जादू, जानें कैसे 200 बार पर्दे पर उतरी मर्यादा पुरुषोत्तम की गाथा

Bollywood Ramayana: भारतीय सिनेमा में प्रभु श्री राम की गाथा 1917 की मूक फिल्म 'लंका दहन' से शुरू होकर आज आधुनिक VFX वाली रणबीर कपूर की 'रामायण' तक पहुंच चुकी है, जहां 100 सालों में 200 से अधिक बार तकनीक और चेहरे तो बदले लेकिन 'राम नाम' का जादू और दर्शकों की अटूट श्रद्धा आज भी वैसी ही बरकरार है।

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 4:29 PM
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भारतीय संस्कृति में 'रामायण' सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक ऐसा अहसास है जो हर पीढ़ी के रग-रग में बसा है। यही कारण है कि जब भारतीय सिनेमा ने अपने नन्हे कदम रखे थे, तब से लेकर आज के आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) के दौर तक, फिल्मकारों के लिए 'राम कथा' सबसे प्रिय विषय रही है। हाल ही में रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म 'रामायण' के टीजर ने एक बार फिर इस चर्चा को छेड़ दिया है कि आखिर क्यों 100 साल बीत जाने के बाद भी इस कहानी का जादू कम नहीं हुआ।

मूक फिल्मों से शुरू हुआ सफर

रामायण को पर्दे पर उतारने की शुरुआत तब हुई जब फिल्मों में आवाज नहीं होती थी। साल 1917 में भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के ने 'लंका दहन' बनाई थी। उस दौर में श्रद्धा का आलम यह था कि लोग सिनेमाघरों में जूते उतारकर बैठते थे और जैसे ही स्क्रीन पर प्रभु श्री राम प्रकट होते, लोग हाथ जोड़कर नमन करने लगते थे। इसके बाद 1934 में देबाकी कुमार बोस की फिल्म 'सीता' आई, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई।bharat milaap

हर दशक का अपना 'राम अवतार'


40 और 50 के दशक में 'भारत मिलाप' और 'राम राज्य' जैसी फिल्मों ने सफलता के झंडे गाड़े। दिलचस्प बात यह है कि 'राम राज्य' उस दौर की इकलौती ऐसी फिल्म थी जिसे महात्मा गांधी ने देखा था। जैसे-जैसे सिनेमा तकनीक में आगे बढ़ा, दक्षिण भारतीय सिनेमा ने भी इस महागाथा को अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एन.टी. रामा राव (NTR) जैसे दिग्गजों ने पर्दे पर श्री राम का ऐसा जीवंत रूप लिया कि लोग उन्हें वास्तव में भगवान मानने लगे थे।raam rajya

रामानंद सागर का वो 'स्वर्ण युग'

जब भी रामायण का जिक्र होता है, 80 के दशक के उस दौर को भुलाया नहीं जा सकता जब रविवार की सुबह सड़कें सूनी हो जाया करती थीं। रामानंद सागर के टीवी शो 'रामायण' ने इतिहास रच दिया। अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया घर-घर में पूजे जाने लगे। यह सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय उत्सव बन गया था, जिसने रामायण को हर छोटे-बड़े घर के ड्राइंग रूम तक पहुंचा दिया।arun giovil ramyan

एनिमेशन और आधुनिक प्रयोग

सिर्फ फीचर फिल्में ही नहीं, बल्कि एनिमेशन के जरिए भी बच्चों को राम कथा से जोड़ा गया। 1992 की जापानी एनिमेशन फिल्म 'द लीजेंड ऑफ प्रिंस रामा' आज भी एक मास्टरपीस मानी जाती है। समय बदला और तकनीक ने अपनी जगह बनाई, जिसके बाद 'आदिपुरुष' जैसे बड़े बजट के प्रयोग भी हुए। हालांकि, 'आदिपुरुष' को अपनी भाषा और चित्रण के कारण आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन इसने यह साबित कर दिया कि दर्शक रामायण के मूल स्वरूप के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते।aadipurush

अब रणबीर की 'रामायण' से उम्मीदें

अब साल 2026 में निर्देशक नितेश तिवारी अपनी भव्य फिल्म 'रामायण' लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म में रणबीर कपूर श्री राम की भूमिका में हैं, वहीं साई पल्लवी माता सीता और यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। लगभग 4000 करोड़ के भारी-भरकम बजट और आधुनिक तकनीक के साथ बन रही यह फिल्म दीवाली 2026 पर रिलीज होगी। टीजर में रणबीर का लुक और फिल्म की भव्यता यह उम्मीद जगाती है कि यह आधुनिक पीढ़ी के लिए एक नया माइलस्टोन साबित होगी।ramayanaa

आंकड़े बताते हैं कि रामायण पर अब तक अलग-अलग भाषाओं में करीब 200 बार फिल्में, टीवी शो और शॉर्ट फिल्में बन चुकी हैं। कैमरे बदले, कलाकार बदले और तकनीक भी एडवांस हुई, लेकिन 'राम नाम' का जो आकर्षण 1917 में था, वही आज 2026 में भी बरकरार है। यह महागाथा हमें सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, जीत हमेशा सत्य और धर्म की ही होती है।

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