उदयपुर की अदालत ने मशहूर फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेताम्बरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। चिकित्सा आधार पर दायर अंतरिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने दोनों को उदयपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
यह मामला इंदिरा आईवीएफ और इंदिरा ग्रुप के संस्थापक डॉक्टर अजय मुर्डिया की शिकायत पर आधारित है, जिन्होंने आरोप लगाया कि विक्रम भट्ट की टीम ने उनकी दिवंगत पत्नी पर बायोपिक सहित चार फिल्मों के नाम पर भारी भरकम राशि ऐंठ ली। डॉ. मुर्डिया ने बताया कि दिनेश कटारिया के जरिए उन्हें यह प्रोजेक्ट मिला, फिर मुंबई के वृंदावन स्टूडियो में भट्ट से मिले जहां 7 करोड़ निवेश पर 100-200 करोड़ कमाई का लालच दिया गया। कुल 2.45 करोड़ व्यक्तिगत रूप से और इंदिरा एंटरटेनमेंट के जरिए 42.7 करोड़ का भुगतान हुआ, जबकि कुल बजट महज 47 करोड़ था।
पुलिस जांच में सामने आया कि चार फिल्मों में से केवल दो पूरी हुईं और रिलीज हुईं। तीसरी फिल्म 'विश्व विराट' का मात्र 25% काम हुआ, जबकि चौथी 'महाराणा-रण' पर एक पैसा भी खर्च नहीं। खासकर 25 करोड़ की आखिरी किस्त का दुरुपयोग और फर्जी बिलों का इस्तेमाल प्रमुख आरोप हैं। एफआईआर में आठ आरोपी नामजद हैं, जिसमें भट्ट दंपति मुख्य हैं।
9 दिसंबर को अदालत ने उन्हें सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा था। रिमांड खत्म होने के बाद 16 दिसंबर को जब उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, तो उनके वकील ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की। लेकिन अदालत ने तर्कों को खारिज करते हुए दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वकील मंजूर हुसैन ने कहा कि आरोपियों की तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें इलाज की जरूरत है, लेकिन कोर्ट ने माना कि जांच अभी जारी है और इस समय जमानत देना उचित नहीं होगा।
फिल्म इंडस्ट्री में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। डॉ. मुर्डिया जैसे सफल व्यवसायी का भरोसा तोड़ना सवाल उठाता है कि फिल्म फंडिंग में पारदर्शिता क्यों लापता है? जांच आगे बढ़ने से और खुलासे संभव हैं।