बॉलीवुड में 'नवाब' के नाम से मशहूर सैफ अली खान हमेशा से अपने प्रयोगधर्मी किरदारों के लिए जाने जाते रहे हैं। 'ओंकारा' के लंगड़ा त्यागी से लेकर 'सेक्रेड गेम्स' के सरताज सिंह तक, उन्होंने हर बार दर्शकों को हैरान किया है। इन दिनों सैफ अपनी नई फिल्म 'कर्तव्य' को लेकर चर्चा में हैं, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। इसी बीच, एक इंटरव्यू के दौरान सैफ अली खान ने एक बेहद दिलचस्प और संजीदा बात साझा की है। उन्होंने बताया कि जब एक अभिनेता को बार-बार एक ही जॉनर (Genre) की फिल्में मिलती हैं, तब भी वह हर किरदार को एक-दूसरे से अलग और अनोखा कैसे बना सकता है।
"खुद के प्रति ईमानदार रहें, किरदार अपने आप अनोखा बन जाएगा"
आजकल ओटीटी और सिनेमाघरों में क्राइम और कॉप ड्रामा (Crime and Cop Dramas) की बाढ़ सी आई हुई है। ऐसे में जब सैफ से पूछा गया कि एक जैसे जॉनर में काम करते हुए भी वह अपने किरदारों में नयापन कैसे लाते हैं? इस पर सैफ ने बेहद सादगी से जवाब दिया: "मेरे लिए सबसे बुनियादी बात यह है कि मैं सिर्फ एक पुलिस वाले का रोल नहीं प्ले करता, बल्कि मैं उस इंसान को जीने की कोशिश करता हूं। हर इंसान स्वभाव से एक-दूसरे से अलग होता है। अगर मुझे दोबारा कोई ऐसा ही किरदार निभाना पड़े जिसकी भाषा या बैकग्राउंड मिलता-जुलता हो, तो वहां निर्देशक की भूमिका अहम हो जाती है, जो एक अलग माहौल तैयार करता है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि अगर आप खुद के प्रति ईमानदार हैं, तो आपकी शख्सियत का कोई न कोई अनोखा हिस्सा उस किरदार में झलक ही जाता है। दुनिया में आपके जैसा कोई दूसरा नहीं है, इसलिए खुद के प्रति सच्चे रहकर ही किरदार को नयापन दिया जा सकता है।"
को-स्टार रसिका दुगल ने भी मिलाए सुर में सुर
सैफ अली खान की फिल्म 'कर्तव्य' की सह-अभिनेत्री और 'मिर्जापुर' फेम रसिका दुगल ने भी सैफ की इस बात का पूरा समर्थन किया। रसिका का मानना है कि भले ही फिल्मों का जॉनर एक जैसा हो, लेकिन हर फिल्म की स्क्रिप्ट और उसे लिखने वाले की सोच बिल्कुल अलग होती है। हर नया लेखक या निर्देशक कहानी में अपने जीवन के अनुभव, अपनी सोच और अपनी भावनाएं लेकर आता है, जिससे वह काम हर बार बिल्कुल नया और अलग बनकर उभरता है। इसलिए एक कलाकार के तौर पर कभी यह डर नहीं होना चाहिए कि कुछ अलग कैसे किया जाए।
क्या है फिल्म 'कर्तव्य' की कहानी?
नेटफ्लिक्स इंडिया की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 'कर्तव्य' सिर्फ एक थ्रिलर या क्राइम ड्रामा नहीं है, बल्कि यह इंसानी जज्बातों और उलझनों की एक बेहद गहरी कहानी है। फिल्म में एक ऐसे शख्स (पुलिसवाले) के आंतरिक द्वंद्व को दिखाया गया है, जो अपने काम के प्रति कर्तव्य, अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी और मुश्किल फैसलों से पैदा होने वाले भावनात्मक परिणामों के बीच बुरी तरह फंसा हुआ है। सैफ अली खान की संजीदा एक्टिंग ने इस जटिल किरदार को जीवंत कर दिया है।