ओपनिंग वीकेंड खत्म होते ही फिल्म ‘इक्कीस’ की बॉक्स ऑफिस यात्रा अब वर्किंग डेज़ के असली इम्तिहान से गुजर रही है। दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होने के चलते दर्शकों और ट्रेड से इसे लेकर काफी उम्मीदें थीं। शुरुआती दिनों में फिल्म को भावनात्मक जुड़ाव और सम्मान जरूर मिला, लेकिन कमाई के आंकड़ों में वह असर नजर नहीं आया जिसकी उम्मीद की जा रही थी। रविवार को फिल्म ने संतुलित प्रदर्शन किया, जिससे थोड़ी राहत मिली, मगर सोमवार आते ही तस्वीर कुछ बदली हुई दिखी। वीकेंड की तुलना में वर्किंग डे पर दर्शकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई, जिसका सीधा असर कलेक्शन पर पड़ा।
इससे साफ हो गया कि फिल्म के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ‘इक्कीस’ बॉक्स ऑफिस पर खुद को किस तरह संभाल पाती है और क्या वर्ड ऑफ माउथ इसके लिए कोई बड़ा सहारा बन पाता है या नहीं।
मंडे टेस्ट में लड़खड़ाई ‘इक्कीस’
नए साल के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘इक्कीस’ का निर्देशन मशहूर डायरेक्टर श्रीराम राघवन ने किया है। ये फिल्म अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा की सिल्वर स्क्रीन पर डेब्यू मूवी भी है। क्रिटिक्स और दर्शकों से फिल्म को पॉजिटिव रिव्यू मिले, लेकिन इसके बावजूद कमाई के मोर्चे पर यह खास कमाल नहीं दिखा पाई।
पांचवें दिन की कमाई ने बढ़ाई चिंता
अगर बात करें Day 5 Box Office Collection की, तो सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को फिल्म ने करीब 2 करोड़ रुपये का ही कारोबार किया। ये आंकड़ा फिल्म के लिए निराशाजनक माना जा रहा है। सोमवार की कमाई जोड़ने के बाद अब पांच दिनों में ‘इक्कीस’ का कुल कलेक्शन लगभग 22 करोड़ रुपये पहुंच पाया है। इन नंबरों से साफ है कि फिल्म मंडे टेस्ट में बुरी तरह फेल हो गई।
बजट के आगे फीकी पड़ती कमाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ‘इक्कीस’ का कुल बजट करीब 60 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। मौजूदा कमाई को देखते हुए फिल्म अभी भी लागत निकालने से काफी दूर है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि ‘इक्कीस’ फ्लॉप होने की कगार पर खड़ी दिखाई दे रही है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ का असर भी इसकी कमाई पर पड़ा है।
कहानी और अभिनय ने जीता दिल
भले ही बॉक्स ऑफिस पर ‘इक्कीस’ संघर्ष कर रही हो, लेकिन कंटेंट के मामले में फिल्म ने दर्शकों का ध्यान जरूर खींचा है। भारतीय सेना के शहीद सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित इस बायोपिक को इमोशनल और प्रेरणादायक बताया जा रहा है। अगस्त्य नंदा ने अपने किरदार को पूरी गंभीरता और ईमानदारी से निभाया है, जिसकी तारीफ क्रिटिक्स ने खुलकर की है।