Asha Bhosle Death: सिंगर बदले, बैन लगा पर 55 साल बाद भी इस एक गाने पर झूम रही पूरी दुनिया...आवाज के दम पर दशकों राज करने की कहानी

Asha Bhosle Death: 1971 में रिलीज हुई हिट फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ को ‘हिप्पी मूवमेंट’ के खिलाफ एक संदेश देने के लिए बनाई गई थी। उस दौर में यह मूवमेंट भारत और आसपास के इलाकों में तेजी से फैल रहा था। लेकिन अगर खासकर इस गाने की बात करें, तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि फिल्म नशे की आदत की बुरा बता रही है। बल्कि, इस गाने में नशे को बहुत ही ग्लैमरस तरीके से दिखाया गया था, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 4:00 PM
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आशा भोसले अब भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन वो अपने 7 दशक लंबे करियर से अनगिनत यादें और गानें पीछे छोड़ गई हैं।

बीते 70 सालों में हिन्दी सिनेमा में काफी कुछ बदला, सिल्वर स्क्रिन पर तस्वीरें बदलीं, फिल्मों में गाने बदले और गीतों में बजने वाले साज भी बदले… पर उन गानों में एक आवाज जो हमेशा नई बनी रही वो थी आशा भोसले की आवाज। रविवार 12 अप्रैल 2026 का दिन, हिन्दी सिनेमा को चाहने वालों के लिए काफी भारी रहा। बॉलीवुड की लेजेंडरी सिंगर्स में से एक आशा भोसले ने दुनिया को अलविदा कह दिया।  आशा भोसले अब भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, लेकिन वो अपने 7 दशक लंबे करियर से अनगिनत यादें और गानें पीछे छोड़ गई हैं। उनके उन्हीं गानों में से एक है - 'दम मारो दम'।

70-80 के दशक का फेमस गाना 'दम मारो दम' आज भी हर किसी की जुबां पर रहता है। साल 1971 में आई फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का ये गाना काफी हिट हुआ था। 60-70 के दशक में भारत में बड़ा सामाजिक बदलाव हो रहा था। पश्चिमी संस्कृति, हिप्पी मूवमेंट और युवाओं की नई सोच ने लोगों की लाइफस्टाइल बदल दी थी। इसके साथ ही सिनेमा और म्यूजिक में भी बड़े बदलाव हुए, जिसको पसंद भी किया गया और विवाद भी खड़ा हुआ। आशा भोसले का भी एक ऐसा ही गाना था जिसे उन्हें तारीफ तो काफी मिली पर विवादों ने कभी उनका पीछा नहीं छोड़ा। नौबत यहां तक आई थी कि सरकार आशा भोसले के इस गाने को बैन तक कर दिया।

रेडियो और टीवी पर लगा था बैन


1971 में रिलीज हुई हिट फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ को ‘हिप्पी मूवमेंट’ के खिलाफ एक संदेश देने के लिए बनाई गई थी। उस दौर में यह मूवमेंट भारत और आसपास के इलाकों में तेजी से फैल रहा था। लेकिन अगर खासकर इस गाने की बात करें, तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि फिल्म नशे की आदत की बुरा बता रही है। बल्कि, इस गाने में नशे को बहुत ही ग्लैमरस तरीके से दिखाया गया था, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था। यही वजह थी कि यह गाना लोगों के बीच बहुत फेमस हो गया, लेकिन इसके कंटेंट को लेकर विवाद भी हुआ। इसी कारण ऑल इंडिया रेडियो ने इस गाने पर बैन लगा दिया था। इतना ही नहीं, जब यह फिल्म टीवी पर दिखाई गई, तो दूरदर्शन ने भी इस गाने को फिल्म से हटा दिया था।

फिल्म में यह गाना उस समय आता है, जब देव आनंद का किरदार प्रशांत अपनी बहन जेनिस (जिसे जीनत अमान ने निभाया है) को काठमांडू में ढूंढ़ लेता है। जेनिस वहां एक पूरी तरह आज़ाद और बेफिक्र ज़िंदगी जी रही होती है। ऐसे में प्रशांत उसे नशे की दुनिया से निकालकर एक सामान्य जीवन में वापस लाने की कोशिश करता है। इस गाने के बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। यह गाना सिर्फ इसलिए नहीं बनाया गया था कि फिल्म में कोई ग्लैमरस सीन दिखाना है, बल्कि इसके पीछे गीतकार आनंद बख्शी और संगीतकार आर. डी. बर्मन की खास सोच थी। उन्होंने तय किया कि वे इस सीन के लिए कुछ अलग और बेहतर बनाएंगे।

पहले लता मंगेशर गाने वाली थी ये गाना

आज ‘दम मारो दम’ गाने को आशा भोसले की आवाज के बिना सोचना मुश्किल है, लेकिन शुरुआत में इस गाने की योजना कुछ अलग थी। पहले इसे लता मंगेशकर और उषा उथुप के डुएट के रूप में तैयार किया जा रहा था, जिसे मुमताज और जीनत अमान पर फिल्माया जाना था। फिल्म में मुमताज का किरदार एक सीधी-सादी ‘अच्छी लड़की’ का था, इसलिए उनकी आवाज लता मंगेशकर को देनी थी। वहीं, ज़ीनत अमान का किरदार एक ‘बोल्ड’ लड़की का था, जिसके लिए उषा उथुप की आवाज तय की गई थी।

दरअसल, देव आनंद ने उषा उथुप को यह गाना तब ऑफर किया था, जब उन्होंने उन्हें दिल्ली के एक होटल में गाते हुए सुना था। उस समय साफ कहा गया था कि यह गाना लता और उषा का डुएट होगा। इसका जिक्र द क्वीन ऑफ़ इंडियन पॉप में भी किया गया है। लेकिन किसी वजह से लता मंगेशकर ने इस प्रोजेक्ट से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद यह तय हुआ कि गाना आशा भोसले और उषा उथुप मिलकर गाएंगी, लेकिन आखिर में यह प्लान भी बदल गया।

12 हफ्तों तक टॉप पर बना रहा

‘दम मारो दम’ गाना रिलीज होते ही उस समय काफी विवादों में आ गया था। ऑल इंडिया रेडियो ने इस गाने पर बैन लगा दिया था, यानी इसे रेडियो पर नहीं बजाया जाता था। लेकिन दूसरी तरफ अपने मशहूर शो ‘बिनाका गीतमाला’ के लिए जाने जाने वाला रेडियो सीलोन पर यह गाना लगातार कई महीनों तक हर हफ्ते नंबर 1 पर बना रहा। इतना ही नहीं, इसे ‘सरताज गीत’ का दर्जा भी दिया गया था। यह खास सम्मान उन गानों को मिलता था, जो 12 हफ्तों से ज्यादा समय तक चार्ट में टॉप पर बने रहते थे। उस दौर में दूरदर्शन ही भारत का एकमात्र टीवी चैनल था और जब इस फिल्म को टीवी पर दिखाया जाता था, तो इस गाने को काट दिया जाता था।

'ये हामारा गाना...'

साल 2003 में आशा भोसले ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस गाने के कारण उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार ने इस गाने पर रोक लगा दी थी, इसे रेडियो पर नहीं बजाया जाता था और टीवी पर फिल्म दिखाते वक्त भी इसे हटा दिया जाता था। हालांकि, इन विवादों के बावजूद लोगों के बीच इस गाने को लेकर जबरदस्त दीवानगी थी। 2020 के एक इंटरव्यू में आशा भोसले ने बताया कि एक बड़े कॉन्सर्ट में, जहां मदन मोहन, शंकर-जयकिशन और कल्याणजी-आनंदजी जैसे बड़े कलाकार मौजूद थे, वहां भी सबसे ज्यादा तालियां ‘दम मारो दम’ को ही मिलीं। उन्होंने बताया कि जैसे ही आर. डी. बर्मन (पंचम दा) मंच पर आए और यह गाना शुरू किया, तो करीब एक लाख लोग अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोर-जोर से तालियां बजाने लगे। लोग कह रहे थे, “यह हमारा गाना है।”

आशा भोसले के साथ ही आर.डी. बर्मन के लिए भी ये गाना और फिल्म मील का पत्थर साबित हुई। इस गाने ने भारतीय संगीत के इतिहास में अपनी जगह हमेशा के लिए बना ली।

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