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Devdas: चंद्रमुखी का किरदार माधुरी दीक्षित के लिए है आज भी खास, संजय लीला भंसाली संग काम करने का एक्सपीरिएंस किया शेयर

Devdas: चंद्रमुखी के अपने किरदार के बारे में बात करते हुए माधुरी ने इसे बेहद लेयर्ड और इमोशनली रिच बताया। उन्होंने कहा, “मुझे भंसाली जी के साथ काम करके बहुत मज़ा आया।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Feb 07, 2026 पर 5:45 PM
Devdas: चंद्रमुखी का किरदार माधुरी दीक्षित के लिए है आज भी खास, संजय लीला भंसाली संग काम करने का एक्सपीरिएंस किया शेयर
चंद्रमुखी का किरदार माधुरी दीक्षित के लिए है आज भी खास

Devdas: माधुरी दीक्षित ने संजय लीला भंसाली की 2002 में आई रॉयल फिल्म देवदास में उनके साथ काम करने के अपने अनुभव को याद किया है। यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे विजुअली रिच और भव्य क्लासिक्स में गिनी जाती है। अपनी ग्रैंड सिनेमैटिक विज़न के लिए जाने जाने वाले भंसाली के बारे में माधुरी का कहना है कि उन्होंने सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि फिल्ममेकिंग की पूरी प्रक्रिया में भी कविता घोल दी थी।

चंद्रमुखी के अपने किरदार के बारे में बात करते हुए माधुरी ने इसे बेहद लेयर्ड और इमोशनली रिच बताया। उन्होंने कहा, “मुझे भंसाली जी के साथ काम करके बहुत मज़ा आया। चंद्रमुखी फिल्म का एक बेहद अहम किरदार था। सिर्फ डांस मूव्स ही नहीं, बल्कि फिल्म का हर सीन कविता जैसा लगता है।

अभिनेत्री ने बताया कि चंद्रमुखी की जर्नी उन्हें मीरा बाई की याद दिलाती है। माधुरी ने साझा किया, “उसके भीतर एक जन्मजात मासूमियत है। वह बिल्कुल मीरा जैसी है, क्योंकि वह ऐसे इंसान से प्यार करती है जिसे वह जानती है कि वह उसे कभी वापस प्यार नहीं कर पाएगा। इसलिए हम उस पैशन को, उन छोटे-छोटे एक्सप्रेशंस को कैप्चर करना चाहते थे, जो भाषा और भावनाओं के ज़रिए सामने आते हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनका और भंसाली का साथ काम करने का अनुभव “बेहद खूबसूरत” रहा।

अभिनेत्री ने भंसाली की बारीकी से गढ़ी गई सीक्वेंस की फिज़िकल डिमांड्स पर भी विस्तार से बात की, खासतौर पर आइकॉनिक गाने काहे छेड़ छेड़ मुझे के दौरान। उस भारी-भरकम कॉस्ट्यूम को याद करते हुए माधुरी ने बताया कि उन्होंने जो लहंगा पहना था, वह बेहद वज़नदार था। उन्होंने साझा किया, “वह असली वेलवेट से बना था और उस पर असली एम्ब्रॉयडरी का काम किया गया था। असली मोतियों के इस्तेमाल ने उसे और भी भारी बना दिया था।" उन्होंने आगे बताया कि कॉस्ट्यूम का वज़न इतना ज़्यादा था कि जब वह घूमना बंद भी कर देती थीं, तब भी घाघरा अपने आप उनके चारों ओर घूमता रहता था।

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