बॉलीवुड की 'मर्डर' गर्ल मल्लिका शेरावत एक बार फिर चर्चा में हैं। जब साल 2026 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में आलिया भट्ट जैसी नई पीढ़ी की अभिनेत्रियां अपनी चमक बिखेर रही हैं, तब मल्लिका ने फ्लैशबैक में जाकर अपनी उन यादों को ताजा किया है, जिन्होंने लगभग दो दशक पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी थी। मल्लिका ने अपने कान्स डेब्यू के उन पलों को साझा किया है जब वह मेगास्टार जैकी चैन के साथ रेड कार्पेट पर उतरी थीं।
एक बोल्ड शुरुआत और म मचा 'तूफान'
मल्लिका ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पुरानी तस्वीरें शेयर करते हुए बताया कि 20 साल पहले उनका कान्स डेब्यू कैसा था। उन्होंने याद किया कि उस समय उन्होंने एक 'डेंजरसली लो-कट ब्लाउज' के साथ लहंगा पहना था। आज के दौर में जहाँ फैशन के नाम पर सब कुछ स्वीकार्य है, उस समय मल्लिका के इस पहनावे ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।
मल्लिका लिखती हैं, "मेरे पहले कान्स फिल्म फेस्टिवल में, 20 साल पहले जैकी चैन के साथ! मैंने घाघरा के साथ एक बहुत ही बोल्ड ब्लाउज पहना था... और इसने एक तूफान खड़ा कर दिया था! इसने सुर्खियां बटोरीं, यहाँ तक कि प्रतिष्ठित 'टाइम' पत्रिका में मेरी तुलना सुपरस्टार ब्रिगिट बार्डोट से की गई।"
छोटे शहर की लड़की और बड़े सपने
हरियाणा के एक छोटे से कस्बे से निकलकर फिल्म जगत में अपनी पहचान बनाने वाली मल्लिका के लिए वह पल किसी सपने जैसा था। उन्होंने साझा किया कि कैसे उस समय लोगों ने उनके कपड़ों को 'बहुत ज्यादा' (Too much) करार दिया था। मल्लिका का कहना है कि जो चीज़ उस वक्त लोगों को हजम नहीं हो रही थी, आज वह फैशन की दुनिया में बिल्कुल सामान्य हो चुकी है। वह तंज भरे लहजे में कहती हैं कि वक्त के साथ सिर्फ नजरिया बदलता है, इंसान वही रहता है।
जैकी चैन और 'द मिथ' का सफर
मल्लिका शेरावत साल 2005 में आई फिल्म 'द मिथ' के जरिए ग्लोबल लेवल पर चमकी थीं। इस मार्शल आर्ट्स फैंटेसी फिल्म में उन्होंने जैकी चैन के साथ काम किया था। फिल्म में उन्होंने 'सामंथा' नाम की एक भारतीय लड़की का किरदार निभाया था। निर्देशक स्टेनली टोंग की इस फिल्म ने मल्लिका को रातों-रात अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला दी थी।
बोल्डनेस से लेकर आइकॉन बनने तक
2002 में 'जीना सिर्फ मेरे लिए' से करियर शुरू करने वाली मल्लिका को असली शोहरत 2004 की फिल्म 'मर्डर' से मिली। अपनी बोल्ड इमेज के कारण उन्हें काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं, तो वह गर्व महसूस करती हैं कि उन्होंने उस दौर में वह हिम्मत दिखाई जो आज की अभिनेत्रियों के लिए रास्ता बन गई है।