भारतीय टेलीविजन के पहले सुपरहीरो 'शक्तिमान' यानी मुकेश खन्ना अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर कंटेंपरेरी मुद्दों और मनोरंजन जगत में गिरते स्तर पर अपनी राय रखते रहते हैं। लेकिन इस बार मामला कुछ ज्यादा ही गरमा गया है। स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना और मुकेश खन्ना के बीच शुरू हुई जुबानी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत समय रैना के लोकप्रिय शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट'*से हुई थी। करीब एक साल पहले इस शो के कंटेंट को लेकर मुकेश खन्ना ने कड़ी आपत्ति जताई थी और समय रैना की क्लास लगाई थी। अब एक लंबे अंतराल के बाद समय रैना ने अपने हालिया यूट्यूब वीडियो में इस पर पलटवार किया है, जिसने पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।
अपने वीडियो में समय रैना ने उन सभी लोगों पर निशाना साधा जिन्होंने उस विवाद के दौरान उनकी आलोचना की थी। समय ने मुकेश खन्ना का जिक्र करते हुए कहा, "शक्तिमान आ गया था यार... वह कह रहा था कि मेरे कंटेंट का बच्चों पर क्या असर पड़ेगा। मुझे नहीं पता आपने कितना शक्तिमान देखा है, लेकिन उस समय खबरें आती थीं कि बच्चा शक्तिमान देखकर छत से कूद गया है। तूने तो बच्चे मारे हैं, तू क्या नैतिकता का पाठ पढ़ा रहा है?" समय का यह बयान सीधे तौर पर मुकेश खन्ना की छवि और उनके सबसे प्रतिष्ठित किरदार 'शक्तिमान' पर एक बड़ा प्रहार था।
मुकेश खन्ना का करारा जवाब
समय रैना के इस बयान के वायरल होते ही मुकेश खन्ना का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट लिखकर समय रैना को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा: "कुत्ते की दुम टेढ़ी रहती है, उसे लाख शीशियों में रखो, बाहर निकालो तो फिर टेढ़ी की टेढ़ी! समय रैना की भी एक दुम है, उसे कितना भी सुधारो, वह वापस टेढ़ी हो जाती है क्योंकि वह सीधा प्राणी नहीं, बल्कि एक 'रोस्टेड प्राणी' है।"
मुकेश खन्ना यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपनी पोस्ट में समय रैना के प्रति बेहद सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे लोगों का मुंह काला कर गधे पर बिठाकर पूरे देश में घुमाना चाहिए और गलियों में उनकी परेड निकालनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि समय ने 'शक्तिमान' जैसे बच्चों के सुपरहीरो का अपमान किया है, इसलिए बच्चों को उसे अंडे और टमाटर मारने चाहिए।
नैतिकता और कॉमेडी के बीच की जंग
यह विवाद केवल दो व्यक्तियों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पुरानी पीढ़ी के आदर्शों और नई पीढ़ी की 'डार्क कॉमेडी' या 'रोस्टिंग कल्चर' के बीच के टकराव को भी दर्शाता है। मुकेश खन्ना का मानना है कि कंटेंट में मर्यादा होनी चाहिए, वहीं समय रैना जैसे कॉमेडियन्स इसे अभिव्यक्ति की आजादी और ह्यूमर का हिस्सा मानते हैं।
सोशल मीडिया पर भी फैंस दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ लोग शक्तिमान के बचपन की यादों के कारण मुकेश खन्ना का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ लोग समय रैना के बेबाक अंदाज को सही ठहरा रहे हैं। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि समय रैना इस "गधे वाली परेड" वाली टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।