Rajpal Yadav: राजपाल यादव के जेल जाने के बाद ट्रोल हो रहे नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, फैंस बोले- 'मुश्किल में राजपाल यादव का नहीं बने सहारा'

Rajpal Yadav: बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजपाल यादव आज अपनी कॉमिक टाइमिंग और दमदार अदाकारी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके संघर्ष के दिनों की कहानियां बेहद प्रेरणादायक हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और दिव्येंदु शर्मा ने खुलासा किया कि जब वे इंडस्ट्री में नए थे और आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, तब राजपाल यादव ने उन्हें अपने घर बुलाकर खाना खिलाया।

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 11:25 AM

बॉलीवुड के चहेते कॉमेडियन राजपाल यादव आज तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे हैं, लेकिन एक जमाना था जब उनका छोटा-सा घर स्ट्रगलिंग एक्टर्स का सहारा बनता था। नवाजुद्दीन सिद्दीकी और दिव्येंदु शर्मा जैसे सितारे, जो आज स्टारडम की चोटी पर हैं, तब राजपाल के घर खाना खाने और हौसला जुटाने आते थे। चेक बाउंस मामले की इस काली घड़ी में पुराने दोस्तों की खामोशी ने सवाल खड़े कर दिए हैं जब हाथ थामने की बारी आई, तो वो लंगर वाला भाईचारा कहां गायब हो गया?

पुराने दिनों को याद करते हुए नवाजुद्दीन ने एक इंटरव्यू में बताया था, "राजपाल भाई का घर लंगर की तरह था। जब उनका काम चल रहा था, तब हम स्ट्रगलर्स शाम को इकट्ठा होते। कभी इंकार नहीं किया, उफ्फ तक न की। मजाक-मस्ती के बीच खाना मिलता, सपनों की बातें होतीं।" पांच साल की थिएटर ट्रेनिंग शेयर करने वाले दोनों एक्टर्स के बीच वो दोस्ती आज भी याद आती है। दिव्येंदु शर्मा ने भी कबूला, "हम सब वहीं मिलते, खाना बनाते। कल की चिंता नहीं सताती थी। राजपाल भाई ने कभी पैसे नहीं पूछे।" ये किस्से बताते हैं कि मुंबई के संघर्ष में राजपाल कितने बड़े दिल वाले थे।

आज हालात उलट हैं। 9 करोड़ के चेक बाउंस केस में जेल पहुंचे राजपाल ने सरेंडर के वक्त आंखें नम कीं, बोले "सर, पैसे नहीं, दोस्त नहीं, कोई रास्ता नहीं। अकेले हैं हम।" सोनू सूद ने फिल्म ऑफर कर मदद की, लेकिन जिन्होंने उनके लंगर खाया, वे चुप हैं। सोशल मीडिया पर फैंस #StandWithRajpal चला रहे हैं, पुराने वीडियो शेयर कर रहे। एक फैन ने लिखा, "जब हम भूखे थे, राजपाल ने खिलाया। आज उनकी बारी है।"

नवाज़ुद्दीन और दिव्येंदु जैसे कलाकारों के लिए राजपाल यादव का यह सहयोग सिर्फ आर्थिक मदद नहीं बल्कि भावनात्मक सहारा भी था। इंडस्ट्री में जहां अक्सर प्रतिस्पर्धा और दूरी देखने को मिलती है, वहीं राजपाल यादव ने साबित किया कि इंसानियत और भाईचारा सबसे ऊपर है।


आज नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और दिव्येंदु दोनों ही सफल कलाकार हैं। नवाज़ुद्दीन ने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘मंटो’ और ‘रमन राघव 2.0’ जैसी फिल्मों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया, जबकि दिव्येंदु ने ‘प्यार का पंचनामा’ और ‘मिर्जापुर’ से अपनी अलग पहचान बनाई। दोनों ही कलाकार मानते हैं कि राजपाल यादव का सहयोग उनके संघर्ष के दिनों में बेहद अहम था।

यह कहानी एक बार फिर याद दिलाती है कि बॉलीवुड सिर्फ चमक-दमक और ग्लैमर नहीं है, बल्कि यहां रिश्तों की गर्माहट और इंसानियत भी मौजूद है। राजपाल यादव का यह योगदान उन्हें सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि एक सच्चा इंसान साबित करता है।

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