Parineeti Chopra: बेटे नीर के जन्म के बाद परिणीति चोपड़ा की पोस्टपार्टम जंग, खुद को काल्म रखने का बताया मंत्र

Parineeti Chopra: बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपने पोस्टपार्टम फेज को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि मां बनने के बाद का समय जितना खूबसूरत होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता है। इस दौरान महिलाओं को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की थकान का सामना करना पड़ता है।

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 9:58 AM
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बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा मां बनने के बाद नई जिंदगी जी रही हैं। अक्टूबर 2025 में पति राघव चड्ढा के साथ उनके बेटे नीर का स्वागत हुआ, जो अब तीन महीने के हो चुके हैं। इस खूबसूरत बदलाव के साथ ही परिणीति पोस्टपार्टम फेज से गुजर रही हैं, जहां हार्मोनल उथल-पुथल और थकान आम है। उन्होंने अपने यूट्यूब व्लॉग में खुलकर बताया कि कैसे वे इस चुनौतीपूर्ण समय में मानसिक शांति बनाए रखती हैं सुबह फोन को इग्नोर कर मंत्र जाप से दिन की शुरुआत करती हैं। [

परिणीति कहती हैं कि ज्यादातर लोग आंख खुलते ही मोबाइल स्क्रॉल करने लगते हैं, जो दिमाग को सुन्न कर देता है। "इससे पूरा दिन बर्बाद हो जाता है। बेहतर है सुबह एक घंटा फोन से दूर रहें, बोरियत महसूस करें, संगीत सुनें, प्रकृति की गोद में पक्षियों की चहचहाहट सुनें।" वे आगे बताती हैं कि हनुमान चालीसा या 'नमामि शमिशान' का जाप उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। "ये मंत्र मुझे स्थिर रखते हैं। चाहे दिन में सुख हो या दुख, रिएक्शन कंट्रोल में रहता हूं क्योंकि सुबह पॉजिटिव एनर्जी से भर जाती हूं।" उनका मानना है कि सकारात्मक मन शरीर को भी मजबूत बनाता है।

मां बनना परिणीति के लिए जीवन का सबसे सुंदर लेकिन चुनौतीपूर्ण अध्याय है। वे फिल्मों से ब्रेक लेकर बेटे की देखभाल में व्यस्त हैं, लेकिन व्लॉग्स से फैंस से जुड़ी रहती हैं। "मानसिक स्वास्थ्य इस फेज में सर्वोपरि है। पॉजिटिव रहोगी तो बॉडी खुद रिकवर कर लेगी।" फैंस उनकी सादगी और स्ट्रेंथ की तारीफ कर रहे हैं। एक फैन ने कमेंट किया, "परिणीति मैम, आपकी ये बातें लाखों नई मांओं के काम आएंगी।" यह खुलासा न सिर्फ उनकी मजबूती दिखाता है, बल्कि दूसरी महिलाओं को प्रेरित करता है। परिणीति साबित कर रही हैं कि आध्यात्मिकता और सेल्फ-केयर से हर मुश्किल आसान हो जाती है।

अभिनेत्री ने यह भी साझा किया कि मातृत्व के शुरुआती दिनों में नींद की कमी, शारीरिक बदलाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव आम हैं। ऐसे में परिवार और दोस्तों का सहयोग बेहद अहम होता है। उन्होंने बताया कि इस फेज में महिलाएं अक्सर खुद को पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन असल में उन्हें अपनी ज़रूरतों को सबसे पहले रखना चाहिए।


परिणीति का मानना है कि समाज को भी नई मांओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृत्व को सिर्फ खुशी का दौर मानना गलत है, क्योंकि इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित किया कि वे खुलकर अपनी भावनाएँ साझा करें और मदद लेने से हिचकिचाएँ नहीं।

उनकी यह साफगोई दर्शाती है कि बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे भी कलाकार वही संघर्ष झेलते हैं जो आम लोग करते हैं। परिणीति ने अपने अनुभव से यह संदेश दिया कि मातृत्व के बाद का समय किसी भी महिला के लिए आसान नहीं होता, लेकिन सही सहयोग और आत्म-देखभाल से इसे संतुलित बनाया जा सकता है।

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