भोजपुरी सिनेमा से लेकर टीवी और अब राजनीति तक के सफर में नाम कमाने वाले रवि किशन ने छोटे पर्दे के कलाकारों के हक के लिए बड़ी पहल की है। गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में टीवी कैटेगरी जोड़ने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सिनेमा को तो हर साल प्रतिष्ठित सम्मान मिलता है, लेकिन टीवी आर्टिस्ट्स, जो सालों मेहनत करते हैं, उन्हें वो मान्यता नहीं मिलती। ये मांग टीवी प्रोड्यूसर बिनैफर कोहली के सुझाव से आगे बढ़ी है, जिन्होंने 'सास-बहू और बेटियां', 'भाबीजी घर पर हैं' जैसे हिट शोज दिए।
रवि किशन ने कहा, "देश में टीवी के लिए कई अवॉर्ड्स हैं, लेकिन नेशनल अवॉर्ड का सम्मान अलग स्तर का है।" उन्होंने बिनैफर के साथ मिलकर मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने का वादा किया। रवि का मानना है कि इससे बेहतर कंटेंट बनेगा, खासकर भारत की संस्कृति और इतिहास पर आधारित शोज होंगे। ये अवॉर्ड अलग सेरेमनी में हो या फिल्म अवॉर्ड्स में शामिल, लेकिन टीवी को जगह मिलनी चाहिए। बिनैफर ने तर्क दिया कि टीवी आर्टिस्ट्स सबसे ज्यादा रेवेन्यू देते हैं, लंबे घंटे शूटिंग करते हैं और लाखों को रोजगार देते हैं।
ये पहली बार नहीं जब रवि ने टीवी इंडस्ट्री के लिए आवाज उठाई। हाल ही में 'भाबीजी घर पर हैं' ट्रेलर लॉन्च पर उन्होंने साइड आर्टिस्ट्स के लिए पेंशन, घर-जमीन की सुविधा वाला बिल संसद में पेश किया। पीएम मोदी से चर्चा कर वे कहते हैं, "सिनेमा ने मुझे सब दिया, अब मेरा फर्ज है कि कलाकारों के लिए लडूं।" नेटिजन्स भी सपोर्ट कर रहे - "अनुपमा, तुलसी जैसे कलाकारों को सम्मान मिलना चाहिए।"
रवि का भोजपुरी हिट्स से टीवी 'महत्वपूर्ण व्यक्ति' तक का सफर प्रेरणा है। सांसद रत्न अवॉर्ड से सम्मानित रवि साबित कर रहे हैं कि स्टेज हो या संसद, वे हमेशा हक की लड़ाई लड़ते हैं। अगर ये मांग मानी गई तो टीवी इंडस्ट्री नई ऊंचाइयों को छुएगी। फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द कदम उठाएगी।
टीवी इंडस्ट्री के कई कलाकारों का मानना है कि अगर नेशनल अवॉर्ड्स में टीवी को जगह मिलती है तो यह उनके लिए सपने के सच होने जैसा होगा। आज भी कई टीवी सितारे फिल्मों में पहचान बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अगर टीवी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा तो उनकी मेहनत को सीधा मूल्यांकन और पहचान मिलेगी।