Ek Din review: कंफ्यूजन या कहानी..., साई पल्लवी-जुनैद खान का मैजिक पड़ा फीका

Ek Din review: साई पल्लवी-जुनैद खान की फिल्म एक दिन आज यानी 1 मई को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। फिल्म कैसी है और अगर आप इसे देखने का प्लान कर रहे हैं तो एक बार इस रिव्यू को जरूर पढ़ें।

अपडेटेड May 01, 2026 पर 11:09 AM
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आमिर खान का जी तोड़ प्रमोशन भी फिल्म के लिए वरदान साबित न हो सका है। कैसी है साई पल्लवी और जुनैद खान की 'एक दिन' जानिए...

फिल्म-एक दिन

रेटिंग-2 स्टार

कलाकार- जुनैद खान, साई पल्लवी

निर्देशक- सुनील पांडे

Ek Din review: जुनेद खान और साई पल्लवी की फ़िल्म 'एक दिन' को देखते हुए मुझे सिर्फ एक बात का एहसास हुआ कि अरे ये तो मुझे पता है। जी हां, फिल्म के ट्रेलर में आपको पूरी कहानी जो दिखा दी जाती हैं। फिल्म का जिस हिसाब से प्रमोशन किया जा रहा था, खास कर आमिर खान के जरिए...इसे थोड़ी तो उम्मीद थी। लेकिन अफसोस मूवी उम्मीदों पर खरी न उतर सकी।


फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी दिनेश (जुनैद खान) के ईर्द-गिर्द बुनी गई है। दिनेश एक कपंनी के आईटी डिपार्टमेंट में नौकरी कर रहा है। देखने में ठीक-ठाक ही दिखता है। लेकिन ऑफिस और बाहर कोई लड़की उसे देखती तक नहीं है। लेकिन दिनेश को उसके ऑफिस में काम करने वाली मीरा ( साई पल्लवी) प्यार हो जाता है। वह मीरा को पागलों की तरह चाहने लगता है। लेकिन मीरा का चक्कर अपने शादीशुदा बॉस से होता है। इन सबके बीच ऑफिस सबको जापान ट्रिप पर ले जाता है। वहां एक विश पूरी करने वाले घंटे से दिनेश ये मन्नत मांगता है कि मीरा एक दिन के लिए उसकी हो जाए। अब ये कब कैसे होता है...सब आपको फिल्म देखने के बाद पता चलेगा।

कलाकारों की एक्टिंग

साई पल्लवी की सादगी फिल्म के लिए परफेक्ट है। वो स्क्रीन पर अच्छी लग रही हैं, लेकिन असर कम छोड़ पाती हैं। साई को बॉलीवुड फिल्म में देखने का इंतजार काफी समय से किया जा रहा था। लेकिन डेब्यू के लिए ये फिल्म का चुनाव उनक थोड़ा गलत साबित होता दिख रहा है। जुनैद अपने रोल में जच रहे हैं। उनका रोल ही ऐसे लड़के का है, जो किसी को पसंद नहीं आता है। उसके न तो सिक्स पैक हैं और नहीं वो हैंडमस है। कुणाल कपूर ने इंप्रेस किया है। लेकिन फीकी कहानी उन्हें भी लचर कर देती है।

राइटिंग और डायरेक्शन-म्यूजिक

फिल्म की कहानी को स्नेहा देसाई और स्पंदन देसाई ने लिखा है। वहीं सुनील पांडे ने इसे निर्देशित किया है। बात राइटिंग की करें तो यह बहुत ही कमजोर है। कहानी में कोई इमोशन या लॉजिक नहीं हैं। बस सबकुछ जल्दबाजी में होता दिख रहा है। फिल्म का लॉजिक हजम करने में आपको थोड़ा टाइम लगेगा। गाने का म्यूजिक राम संपत ने दिया है। लेकिन यह भी बहुत यादगार या जुबान पर चढ़ने वाला नहीं है।

कैसी है फिल्म

फिल्म देखने के टाइम आपको ऐसा लगेगा कि आप इसे पहले देक चुके हैं। जी हां क्योंकि फिल्म के ट्रेलर में आपको पूरी कहानी दिखा दी जाती है। बस लास्ट के कुछ सीन आपको नए देखने को मिलते हैं। क्लाइमेक्स बेहद कमजोर हैं। कुछ मिलाकर कहा जाए तो अगर आप जुनैद खान और साई पल्लवी के चाहने वाले हैं तो फिल्म को देख सकते हैं।

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