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Maatrubhumi: ‘बैटल ऑफ गलवान’ से ‘मातृभूमि’ तक, सलमान की फिल्म का बड़ा ट्विस्ट

Maatrubhumi: ताजा रिपोर्ट बताती है कि सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ कभी पारंपरिक युद्ध फिल्म नहीं रही। हालांकि यह 2020 के भारत-चीन टकराव की पृष्ठभूमि पर आधारित है, फिल्म का मुख्य संदेश संघर्ष या हिंसा नहीं बल्कि शांति और सहयोग को बढ़ावा देना है, जिससे दर्शकों तक एक सकारात्मक और प्रेरक कहानी पहुंचती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 08, 2026 पर 3:33 PM
Maatrubhumi: ‘बैटल ऑफ गलवान’ से ‘मातृभूमि’ तक, सलमान की फिल्म का बड़ा ट्विस्ट
Maatrubhumi: फिल्म का पुराना नाम और टीजर देखकर कई लोगों ने सोचा कि यह सीधे युद्ध पर आधारित है।

सलमान खान इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘मातृभूमि’ की शूटिंग में पूरी तरह व्यस्त हैं। यह फिल्म पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ के नाम से जानी जाती थी, लेकिन हाल ही में इसका नाम बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया गया। नाम परिवर्तन के बाद से सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इस फैसले को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया कि सलमान ने स्क्रिप्ट में बदलाव किया और इसे पारंपरिक युद्ध फिल्म से हटाकर शांति और देशभक्ति पर आधारित ड्रामा बनाया।

कई लोगों ने यह भी अनुमान लगाया कि फिल्म में युद्ध की जगह इंसानी भावनाओं, देशभक्ति और मानवीय संघर्ष को प्रमुख रूप से दिखाया जाएगा। हालांकि ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म कभी भी सख्त युद्धकहानी नहीं थी। इसका फोकस हमेशा सैनिकों की मानवीय भावनाओं, उनके घर और फील्ड के जीवन की जटिलताओं, और शांति तथा सहयोग के संदेश पर रहा है।

युद्ध के बजाय शांति का संदेश

फिल्म भले ही 2020 के भारत-चीन टकराव के पृष्ठभूमि पर आधारित है, लेकिन इसका मकसद युद्ध को महिमा मंडित करना नहीं, बल्कि शांति और मानवता का संदेश देना है। सूत्रों के अनुसार, सलमान खान ने निर्देशक अपूर्वा लाखिया की फिल्म साइन करते समय यह शर्त रखी कि फिल्म युद्ध का महिमामंडन न करे।

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