Shobhaa De: संगीतकार एआर रहमान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सत्ता में आए बदलाव के कारण काम मिलना बंद हो गया है, जिससे काफी विवाद खड़ा हो गया। लेखिका शोभा डे ने उनके इस बयान को 'बेहद खतरनाक' बताते हुए कहा कि बॉलीवुड पिछले 50 सालों से 'सांप्रदायिक तनाव से मुक्त' है।
शोभा ने एएनआई से रहमान के कमेंट के बारे में बात करते हुए कहा, “यह बहुत ही खतरनाक कमेंट है। मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों कहा, आपको उनसे पूछना चाहिए। लेकिन मैं 50 सालों से बॉलीवुड देख रही हूं। और अगर मैंने कोई ऐसी जगह देखी है जो किसी भी तरह के सांप्रदायिक तनाव से मुक्त है, तो वह बॉलीवुड है।”
संगीतकार के काम न मिलने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए लेखक ने कहा, “अगर आपमें प्रतिभा है, तो आपको मौका मिलेगा। अगर प्रतिभा नहीं है, तो धर्म का इसमें कोई लेना-देना नहीं है, कि आपको मौका नहीं दिया जा रहा है। तो, वह जो कह रहे हैं, वह एक सफल व्यक्ति हैं, एक परिपक्व व्यक्ति हैं। उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था। शायद उनके कुछ कारण हों, आपको उनसे ही पूछना होगा।”
बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में रहमान से पूछा गया कि क्या उन्हें तमिल संगीतकार के रूप में बॉलीवुड में कभी भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “शायद मुझे कभी इसका पता ही नहीं चला, शायद ईश्वर ने इसे छुपा रखा था, लेकिन मैंने ऐसा कुछ भी महसूस नहीं किया। पिछले आठ वर्षों में, शायद सत्ता में बदलाव आया है और अब सत्ता उन लोगों के हाथ में है जो रचनात्मक नहीं हैं। यह सांप्रदायिक मुद्दा भी हो सकता है… लेकिन यह मेरे सामने स्पष्ट रूप से नहीं आया।”
उन्होंने आगे कहा कि कोई भी उनके सामने ये बात नहीं कहता, “मुझे कानाफूसी की तरह पता चलता है कि उन्होंने आपको बुक कर लिया है, लेकिन संगीत कंपनी ने अपने पांच संगीतकारों को ही काम पर रख लिया। मैं कहता हूं अच्छा है, अब मुझे अपने परिवार के साथ आराम करने के लिए और समय मिलेगा। मैं काम की तलाश में नहीं हूं। मैं काम की तलाश में जाना नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि काम मेरे पास आए; मेरी ईमानदारी मुझे काम दिलाए। मैं जिस चीज का हकदार हूं, वो मुझे मिलती है। इंटरव्यू प्रकाशित होने के बाद से रहमान को उनके बयानों के लिए इंटरनेट पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।