Sitaare Zameen Par: बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की नई फिल्म 'सितारे जमीन पर' शुक्रवार, 20 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। 'लाल सिंह चड्ढा' के तीन साल बाद आमिर पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। वहीं अपनी फिल्म के रिलीज से पहले आमीर खान, कुछ अलग करने जा रहे हैं। बता दें कि शुक्रवार को फिल्म का पहला शो अक्सर सुबह जल्दी शुरू होता है। लेकिन 'सितारे जमीन पर' के आमिर खान ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने फिल्म की रिलीज को लेकर एक नया नियम तय किया है, जो बाकी फिल्मों से हटकर है।
आमिर खान ने लिया ये अनोखा फैसला
आमिर खान ने अपनी इस फिल्म की रिलीज के दिन पूरे भारत में सुबह 11 बजे से पहले कोई शो नहीं दिखाया जाएगा। यह फैसला आमिर खान ने खुद लिया है। मिस्टर परफेक्शनिस्ट के यह फैसला लेने का मकसद है कि दर्शक तारोताजा दिमाग से फिल्म का लुत्फ उठाएं। जानकारी के मुताबिक 'सितारे ज़मीन पर' सिनेमाघरों में सुबह 11 बजे से शाम छह बजे के बीच दिखाए जाएंगे और एक दिन में इस फिल्म के चार शो ही दिखाए जाएंगे। बता दें कि आमिर खान अपनी फिल्मों का प्रमोशन भी अनोखे तरीके से करते हैं और इस बार भी वो सही रणनीति अपना रहे हैं। एक्टर का मकसद है कि उनकी फिल्म को ज्यादा से ज्यादा फोकस के साथ दर्शक देखें।
बता दें कि आमिर खान हमेशा से ऐसी फिल्में बनाते आए हैं जो दर्शकों को सोचने, महसूस करने और भावनाओं से जुड़ने का मौका देती हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ भी कुछ ऐसा ही अनुभव देने का वादा करती है। इस फिल्म में आमिर एक बास्केटबॉल कोच के रोल में नजर आएंगे, जो विशेष जरूरतों वाले बच्चों की एक टीम को ट्रेनिंग और गाइड करते हैं।
हटकर है इस फिल्म की कहानी
फिल्म का निर्देशन आरएस प्रसन्ना ने किया है और इसमें जेनेलिया डिसूज़ा भी अहम भूमिका निभा रही हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म से 10 विशेष बच्चों को पहली बार बड़े पर्दे पर अभिनय का मौका मिला है, जो सिनेमा में समावेश और प्रतिनिधित्व को लेकर आमिर की सोच को दर्शाता है। 20 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही यह फिल्म सिर्फ एक स्पोर्ट्स ड्रामा नहीं है, बल्कि यह हौसले, उम्मीद और आत्मविश्वास की कहानी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फिल्म लोगों को उसी तरह छू जाएगी जैसे आमिर की पिछली फिल्मों ‘तारे ज़मीन पर’ और ‘दंगल’ ने किया था। फिल्म इंडस्ट्री के लोग आमिर के इस फैसले की सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने थिएटर के अनुभव को महत्व दिया और समाज को एक मजबूत संदेश दिया कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बदलाव का माध्यम भी हो सकता है।