Sandeep Reddy Vanga: ‘स्पिरिट’ डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा का पुराना बयान फिर हुआ वायरल, सेंसर बोर्ड पर उठाए थे सवाल

Sandeep Reddy Vanga: थलापति विजय की 'जन नायगन' और सेंसर बोर्ड का विवाद गरमाता जा रहा है। फिल्म को UA सर्टिफिकेट देने HC ने सेंसर बोर्ड को फटकार लगाई, फिर बोर्ड ने अपील दाखिल कर दी। इसी बीच संदीप रेड्डी वांगा का पुराना इंटरव्यू सुर्खियों में आ गया।

अपडेटेड Jan 10, 2026 पर 7:49 PM
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बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में चर्चित डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। वजह है उनका पुराना बयान, जो सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल हो रहा है। यह बयान उन्होंने सेंसर बोर्ड को लेकर दिया था, जिसमें उन्होंने फिल्मों की क्रिएटिविटी पर लगने वाली पाबंदियों पर सवाल उठाए थे। दिलचस्प बात यह है कि यह बयान ऐसे समय में चर्चा में आया है जब थलापति विजय की आने वाली फिल्म ‘जना नायकन’ सेंसर बोर्ड के विवादों में घिरी हुई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में वांगा ने कहा, "सेंसर बोर्ड का नियंत्रण सीनियर/रिटायर्ड डायरेक्टर्स को मिलना चाहिए। फिल्ममेकिंग न समझने वाले लोगों को ये जिम्मेदारी न दी जाए।" उनका तर्क था कि पूर्व डायरेक्टर्स क्रिएटिव प्रोसेस समझेंगे, जबकि बाबू लोग बिना कंटेक्स्ट कटिंग कर देते हैं।jana nagna

संदीप रेड्डी वांगा, जिन्होंने ‘कबीर सिंह’ और ‘एनिमल’ जैसी सुपरहिट फिल्मों का निर्देशन किया है, अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पहले कहा था कि सेंसर बोर्ड को फिल्मों की कहानी और प्रस्तुति पर ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए। उनका मानना है कि दर्शक खुद तय करने में सक्षम हैं कि उन्हें क्या देखना है और क्या नहीं। यही बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इसे मौजूदा विवाद से जोड़कर देख रहे हैं।


‘जना नायकन’ को लेकर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों ने फिल्म इंडस्ट्री में बहस छेड़ दी है। कई लोग मानते हैं कि क्रिएटिव फ्रीडम पर बार-बार सवाल उठाना फिल्मकारों के लिए मुश्किलें पैदा करता है। इसी बीच वांगा का पुराना बयान सामने आने से चर्चा और तेज हो गई है। लोग कह रहे हैं कि उनकी बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले थी।

सोशल मीडिया पर फैन्स और फिल्म प्रेमी वांगा के बयान को समर्थन दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सेंसर बोर्ड बार-बार फिल्मों पर रोक लगाएगा तो इंडस्ट्री में नए प्रयोग और दमदार कहानियां सामने नहीं आ पाएंगी। वहीं, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सेंसर बोर्ड की भूमिका जरूरी है ताकि समाज में गलत संदेश न फैले।

संदीप रेड्डी वांगा का पुराना बयान मौजूदा विवादों के बीच फिर से चर्चा का विषय बन गया है। यह दिखाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में क्रिएटिव फ्रीडम बनाम सेंसरशिप की बहस लगातार जारी है। *‘जना नायकन’* विवाद ने इस मुद्दे को और गर्म कर दिया है और वांगा की राय ने इसे नया आयाम दे दिया है।

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