Taapsee Pannu: एक ऐसे फ़िल्मी दौर में जहां ट्रेंड्स जल्दी बदल जाते हैं, तापसी पन्नू अपनी मज़बूत पहचान बनाए रखती हैं। हिंदी सिनेमा में उन्होंने जांच-पड़ताल वाले थ्रिलर और कोर्टरूम ड्रामा में अपनी अलग जगह बनाई है। अस्सी, निर्देशक अनुभव सिन्हा के साथ उनकी तीसरी फ़िल्म है, इससे पहले वे मुल्क और थप्पड़ में साथ काम कर चुकी हैं। इन फ़िल्मों की तरह अस्सी भी समाज से जुड़े ज़रूरी सवाल उठाने वाली कहानी लगती है।
तापसी की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि वह हमेशा ऐसी कहानियां चुनती हैं जहां महिला किरदार सिर्फ़ साथ खड़ी नहीं होती, बल्कि पूरी कहानी की ताक़त बनती है। पिंक में उनकी संवेदनशीलता, मुल्क में साहस और थप्पड़ में आत्मसम्मान की लड़ाई साफ़ दिखती है। वह दिखावे से ज़्यादा सच्चे और भावनात्मक किरदारों को अहमियत देती हैं। उनके छोटे-छोटे हाव-भाव और गंभीर नज़रें किरदारों को असली और भरोसेमंद बना देती हैं।
इसी वजह से अस्सी एक मज़बूत वापसी जैसी लगती है। ट्रेलर में तापसी एक बार फिर गंभीर, निडर और दमदार अंदाज़ में नज़र आती हैं। जाँच और कोर्टरूम की लड़ाई के बीच वह साबित करती हैं कि ऐसे रोल उनके लिए बिल्कुल सही हैं। आज जब कई कलाकार एक जैसे लगने लगे हैं, तापसी पन्नू अब भी अलग और भरोसेमंद नायिका हैं। अस्सी सिर्फ़ उनकी अगली फ़िल्म नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि वह अपनी जगह खुद बनाती हैं और उसी पर कायम रहती हैं।
बात करें तापसी की फिल्म अस्सी के ट्रेलर की तो फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत कोई सुकून या रूमानी एहसास पैदा करने वाला नहीं है। इसे देखते हुए मुट्ठियां बंध जाती हैं, घबराहट और बेचैनी हावी होने लगती है। ट्रेलर बहुत कुछ न कहते हुए भी, कहानी का एहसास करा देता है कि ये रेप सर्वाइवर और इंसाफ के लिए उसकी जद्दोजहद पर आधारित है।
तापसी को इससे पहले भी कई कोर्ट रूम ड्रामा में देखने के बाद उनकी मौजूदगी जरा भी ऊबाऊ नहीं लगती है। ट्रेलर के आखिरी सीन में उनके चेहरे पर स्याही फेंकी गई है और वो बिना डरे कहती हैं, ‘कल फिर आऊंगी आपके पास एक और रेप के मामले को लेकर।’ ट्रेलर ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं।